■संस्कार देती है हिंदी. वैश्विक भाषा के रूप में हिंदी पूरी क्षमता के साथ दूसरे नंबर पर आती है. हिंदी हमारे मूल्यों के साथ साथ संवेदना को भी व्यक्त करती है. पाश्चात्य संस्कृति ने हमें वैचारिक गुलाम बनाया है. हिंदी उस बंधन को तोड़ती है. सांस्कृतिक धरातल पर हिंदी बनी हुई है. वाणिज्यिक स्तर पर हिंदी के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती. संपर्क भाषा के रूप में पूरे विश्व में हिंदी बहुत तेज़ी से अपना साम्राज्य स्थापित कर रही है-डॉ. आर.एन. सिंह,प्राचार्य कला विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग.
♀ आयोजन मुक्तकंठ साहित्य समिति. ♀ मुख्य अतिथि डॉ. आर.एन. सिंह,कार्यक्रम अध्य्क्ष गोविंद पाल, विशिष्ट अतिथि संतोष झांझी,डॉ. सुचित्रा शर्मा. ♀ प्रथम सत्र संचालन ओमप्रकाश...