विशेष : सरलता, सादगी, सत्य, अहिंसा, प्रेम, भाईचारा और शांति उनका शस्त्र था : गाँधी को ढुंढने की आवश्यकता नहीं है, खुद गाँधी बनने की जरूरत है – लेखक गणेश कछवाहा
गाँधी जी ने कहा - जिस सत्य की सर्वव्यापक विश्व भावना को अपनी आंख से प्रत्यक्ष देखना हो तो उसे निम्नतम प्राणी से आत्मवत प्रेम...