विशेष : ‘उद्भावना’ का नेहरू अंक : गालियाँ खा के बेमज़ा न हुआ : समीक्षा, ज़ाहिद खान
👉 'उद्भावना' [जनवरी-मार्च, 2024 : अंक-158] 'उद्भावना' हिंदी-उर्दू साहित्य पर केन्द्रित एक वैचारिक पत्रिका है। बीते अड़तीस साल से यह लगातार निकल रही है।...