हबीब तनवीर : थियेटर ही जीवन था. रंगमंच को सीधे सीधे अपनी मिट्टी और जमीन से जोड़ दिया. उसे एक नई पहचान दी : छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति नाचा को नाट्य शास्त्रीय विधा और शैली से रंगमंच और थियेटर को समृध्द किया हबीब तनवीर ने.. 1 सितम्बर 1923 को उनके जन्म दिवस पर विशेष लेख प्रस्तुत है गणेश कछवाहा की…
👉 हबीब तनवीर हबीब तनवीर को रंगमंच / थियेटर की बहुत अच्छी समझ व तकनीकी अनुभव था। जीवन के विभिन्न रंगों,सामाजिक व राजनैतिक परिस्थितियों को...