‘अच्छा आदमी होता है अच्छा’ के रचनाधर्मी जनवादी कवि नासिर अहमद सिकंदर, हिंदी कविता की प्रगतिशील परंपरा से समकालीन कविता को जोड़ती हुई सार्थक रचनाशीलता की प्रतीक्षा को छोड़कर साहित्यजगत से अलविदा कर गए : आज सुबह 8.00 बजे अंतिम सांस ली और आज शाम 5.00 बजे अंतिम संस्कार [सुपुर्देखाक] होगा
• छत्तीसगढ़ आसपास • भिलाई लगभग दोपहर 12.00 बजे मेरे अज़ीज़ मित्र शायर मुमताज ने फोन में बताया कि 'सिकन्दर' नहीं रहे. मैं नि:शब्द हो...