कविता आसपास : आशीष गुप्ता ‘आशू’ 2 years ago • माँ शारदे - आशीष गुप्ता 'आशू' [ उत्तरप्रदेश ] हम बच्चे सभी, माँ बड़े नादान हैं,, रोज सुबह उठकर, करते तुम्हें प्रणाम हैं ,,...
कविता आसपास : पल्लव चटर्जी 2 years ago ▪️ खुशी ख़ुशी कोई रेडिमेड गारमेंट नहीं न ही उसे पकाया जाता है यह एक दृष्टिकोण है जो कर्मों के परिणाम में निहित है। भावना...
कविता आसपास : सुधा वर्मा 2 years ago • बॉब कट - सुधा वर्मा [ रायपुर : छत्तीसगढ़ ] जाने कितने दिन गुजारे उधेड़ बुन में मगन थी मैं बस एक ही धुन...
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ •साहित्य { पितृ दिवस पर विशेष कविताएं } •तारकनाथ चौधुरी •डॉ. दीक्षा चौबे •रंजना द्विवेदी •डॉ. बलदाऊ राम साहू 2 years ago ▪️ तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़ ] श्रीचरणेषु बाबा! आज तुम अदृश्य हो किंतु अस्पृश्य नहीं ईश्वर की तरह ही हर क्षण तुम्हारी उपस्थिति है,,,...
साहित्य आसपास : विनय सागर जायसवाल 2 years ago ▪️ ग़ज़ल कुछ दोस्त हमारे ही वफ़ादार नहीं थे वरना तो कहीं हार के आसार नहीं थे ख़ुद अपने हक़ों के हमीं हक़दार नहीं थे...
कविता आसपास : रंजना द्विवेदी 2 years ago •चलो आज मैं तुम्हें लिखती हूँ - रंजना द्विवेदी [ रायपुर छत्तीसगढ़ ] अपनी हर जज़्बात,एहसास बयां करती हूं चलो आज मैं तुम्हे लिखती हूं...
विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : तारकनाथ चौधुरी 2 years ago • समय शेष होने से पहले - तारकनाथ चौधुरी { चरोदा, भिलाई, छत्तीसगढ़ } अब भी शेष है गाँव में मेरे शीतल छाया का आवरण।...
गीत : डॉ. दीक्षा चौबे 2 years ago • गीत • दीपक जैसा बनकर जीना - डॉ. दीक्षा चौबे [ दुर्ग : छत्तीसगढ़ ] घोर तिमिर की निष्ठुरता से , लड़ना डटकर होता...
कविताएं : श्रीगोपाल नारसन [ रुड़की, उत्तराखंड ] 2 years ago किसी के लिए दिन है किसी के लिए दिन है किसी के लिए रात है सबका अपना भाग्य या कर्मों की बिसात है जैसा जैसा...
कवि और कविता : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय 2 years ago 👉 डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय ▪️ भूख अरबों - खरबों वर्ष पहले धरती थी आग का गोला ठीक भूखे गरीब के धधकते खाली पेट की तरह...