poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे

▪️ • गीत {1} खेत-बावली बाड़ी आँगन, ठाँव नहीं खोने देना। पुरखों की अनमोल धरोहर, गाँव नहीं खोने देना।। घर-घर मिलता नेह-निमंत्रण, अपनापन संबंधों में।...

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

पेशे से चिकित्सक, कवि, साहित्यकार डॉ. संजय दानी मेरे बड़े अज़ीज़ साहित्यिक मित्र हैं. इनकी लिखी लगभग सभी पुस्तकों के विमोचन में मेरा जाना हुआ....

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

▪️ • नमक की प्रयोजनीयता रसोई में रखे मर्तबान से चुटकियों में नमक लेकर जब कोई भोजन को सुस्वादु बनाता है तब नमक की प्रयोजनीयता...

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

▪️ • पल्लव चटर्जी [ • बांग्ला-हिंदी के प्रगतिशील कवि पल्लव चटर्जी की अब तक बांग्ला में पांच काव्य संग्रह 'खंडमेघ', 'जीवन के नाना रंग',...

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

▪️ • डॉ. गिरधर चंद्रा 'साज़' • पिता- भूषणलाल चंद्रा एवं माता- स्व. मेमबाई चंद्रा के यहां 15 मई, 1975 को ग्राम- सकर्रा, जिला- सक्ति...

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

▪️ • श्रीमती वर्षा ठाकुर • 39 वर्ष तक ग्रामीण अंचल एवं श्रमिक बाहुल्य क्षेत्र में अध्यापन कार्य किया. • शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय...

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

▪️ • टूटा हुआ रिश्ता सैलून के फर्श पर बिखरे पड़े बाल एक -दुसरे को पहचान नहीं पाते जबकि कुछ देर पहले ही वे एक...

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

▪️ • सावन बचपन की यादें जब भी आती संग सावन की बूंदे मुस्काती भीग-भीग मन हरियाता छूटा अल्हड़पन फिर लहराता। वो कागज की नाव...
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