कविता महज़ ये वायरस नहीं – गोविंद पाल 6 years ago महज ये वायरस नहीं कब तक भागते फिरोगे अपने आप से, प्रेम की संक्रमण को छोड़ बहुत आगे निकल आये हो लिहाजा कोरोना की संक्रमण...
कहमुक़री (लुप्त होती एक प्यारी सी विधा) – अरुण कुमार निगम 6 years ago (1) जब अपने परिधान उतारे शीश नवाते जन-गण सारे तन को लागे,तन से उज्ज्वल क्या सखि साजन ? ना सखि चाँवल (2) बुरी-भली पहचान बनाए...
कविता- अभिव्यक्ति पाण्डेय 6 years ago आज जहाँ बस सूखी धरती जल को तरसा करती है माँ कहती है कभी यहाँ, कश्ती तैरा करती थी हरे भरे जो जंगल गम हैं,बड़ी...
गीत, सागर का निमंत्रण – सरोज तोमर 6 years ago सागर का निमंत्रण ------------------------ कूल मुझको रोकता है ,डूबने का भय दिखाकर , और फेनिल धार ,सागर का निमंत्रण दे रही है । बिन बुलाए...
कविता – मां 6 years ago डॉ. बीना सिंह मां तेरा साथ है तो .....................सुखद कहानी है मां तेरा साथ है तो .....................जीवन में रवानी है मां तेरा स्पर्श कराता .........................याद...
कविता : ” तलाशती निगाहें “ 6 years ago कवि - त्र्यम्बक राव साटकर "अम्बर" जरा सा झाँक लीजिए, कोविड में गिरफ्त, उस अपने को, जो आपका अपना है । दूर से,दूरभाष से ही...
कविता 6 years ago कुछ मुट्ठी पर लड़कियां -सीता चौहान 'पवन',ग्वालियर कुछ मुट्ठी भर लड़किया कुछ मुट्ठी भर लड़कियां हमेशा नही ढोती निराशाओं को अपने कंधो पर वह...
शाश्वत सत्य – मृत्यु एक शाश्वत सत्य है 6 years ago डॉ. अंजना श्रीवास्तव कवयित्री सम्पर्क- 99819 23250
जन गीत – मस्त फकीरा जग से बोले 6 years ago कवि - विक्रम अपना मस्त फकीरा जग से बोले जो बोये वो पायेगा कितनी भी हो तेरी ऊँचाई मिट्टी में मिल जाएगा मस्त फकीरा जग...
तुम्हारा स्नेह – सरस्वती धानेश्वर 6 years ago तुम्हारा यूं खामोश होकर देखना मुझे, आश्वस्त कर देता है मेरी रूह को । स्नेह से भरा आमंत्रण, एकांत में स्मृतियां पुकार रहीं हों जैसे...