■कविता आसपास : शुचि ‘भवि’. 4 years ago ♀ रिमझिम रिमझिम कोशिश की है बचपन से अबतक ही उछल कर पकड़ लूँ कुछ बरसती बूँदों को और टाँक आऊँ वापस आसमान के कुर्ते...
■गीत : डॉ. शिवसेन जैन. 4 years ago ♀ गीत आज सभी को है आवश्यकता, वाणी संयम की । निज पर निज के अनुशासन की , व्रत के पालन की ।। बारूदों पर...
■नव गीत : डॉ. दीक्षा चौबे [दुर्ग,छत्तीसगढ़] 4 years ago अंबर-आनन रंगोली से, रूप रहा निखार दौड़-भाग कर रहे पयोधर, सजे वंदनवार. झप-झप कर आँखें मटकाते , ग्रहों की सुन बैन । हलचल कैसी यहाँ...
■लिमवा के पेड़वा हावे जुड़वासा विशेष : अशोक पटेल ‘आशु’ [शिवरीनारायण छत्तीसगढ़] 4 years ago लिमवा के पेड़वा हावे हरियर-हरियर जेखर छईहा लागे ओ सुग्घर-सुग्घर। जिन्हा बिराजे हावे देवी दाई शीतला माथ ल नवावा मैं हर तोरे चरण ला।। आसिस ...
■कविता : परमेश्वर वैष्णव [भिलाई-छत्तीसगढ़]. 4 years ago ♀ मैं मानसून का बादल कुछ तकरार,प्यार कुछ हिदायत, शिकायत है आपसे मिली मुझे ,यही पूंजी मेरी बहुतायत है मानता सुनता हूं तभी कहते आप...
■कविता : सुनीता अग्रवाल [रांची-झारखंड]. 4 years ago ♀ सावन को आने दो पहनूँगी हरी चूड़ियाँ करूँगी मैं श्रिंगार। छटेंगे ग़म के बादल मिलेगा दिल को करार॥ छाएगी ख़ुशियाँ बरसेगा प्यार। होंगे पूरे...
■कविता : तारक नाथ चौधुरी [चरोदा,जिला-दुर्ग,छत्तीसगढ़]. 4 years ago ♀ उतरे मेघ धरा पर ऋतु कोई भी हो क्षिति पर कोहरा या बादलों का डेरा हो- रूकता नहीं है प्रातःकाल सूर्यदेव को अर्घ्य देने...
■कविता आसपास : जयराम जय [ कानपुर, उत्तरप्रदेश ] 4 years ago ♀ पिता पिता दिवस क्यों लोग मनाते हमको समझ न आया सिर्फ पीटते ढ़ोल एक दिन कैसी जग की माया बिना पिता के एक दिवस...
■बाल दोहे : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ [ रायपुर, छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ मिश्का के संग मिल जाता है अनगिनत , लम्हों का आनंद। कटता है हर एक पल , जब मिश्का के संग।। गोदी में ही...
■21 जून योग दिवस पर विशेष दोहा ग़ज़ल : ललित पाल सिंह अर्कवंशी [हरदोई, उत्तरप्रदेश] 4 years ago ♀ दोहा ग़ज़ल जो भी नर नारी सदा,करता नियमित योग। शारीरिक अरु मानसिक, होत न कोई रोग।। इक्कीस जून विश्व में ,योग दिवस कहलाय। रामदेव...