■कविता : सुनीता अग्रवाल [रांची-झारखंड]. 4 years ago ♀ सावन को आने दो पहनूँगी हरी चूड़ियाँ करूँगी मैं श्रिंगार। छटेंगे ग़म के बादल मिलेगा दिल को करार॥ छाएगी ख़ुशियाँ बरसेगा प्यार। होंगे पूरे...
■कविता : तारक नाथ चौधुरी [चरोदा,जिला-दुर्ग,छत्तीसगढ़]. 4 years ago ♀ उतरे मेघ धरा पर ऋतु कोई भी हो क्षिति पर कोहरा या बादलों का डेरा हो- रूकता नहीं है प्रातःकाल सूर्यदेव को अर्घ्य देने...
■कविता आसपास : जयराम जय [ कानपुर, उत्तरप्रदेश ] 4 years ago ♀ पिता पिता दिवस क्यों लोग मनाते हमको समझ न आया सिर्फ पीटते ढ़ोल एक दिन कैसी जग की माया बिना पिता के एक दिवस...
■बाल दोहे : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ [ रायपुर, छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ मिश्का के संग मिल जाता है अनगिनत , लम्हों का आनंद। कटता है हर एक पल , जब मिश्का के संग।। गोदी में ही...
■21 जून योग दिवस पर विशेष दोहा ग़ज़ल : ललित पाल सिंह अर्कवंशी [हरदोई, उत्तरप्रदेश] 4 years ago ♀ दोहा ग़ज़ल जो भी नर नारी सदा,करता नियमित योग। शारीरिक अरु मानसिक, होत न कोई रोग।। इक्कीस जून विश्व में ,योग दिवस कहलाय। रामदेव...
■छत्तीसगढ़ी कविता : कु.धारणी सोनवानी. 4 years ago ♀ मोर छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के अद्भुत लीला , इँहा हावै बत्तीस जिला प्यार अउ बिसवास हे। मन मा अब्बड़ आस हे । इहाँ होथे अड़बड़...
■कविता : डॉ. बलदाऊ राम साहू. 4 years ago ♀ पिता पिता आज आजमाने लगे हैं राह कठिन बताने लगे हैं। सुख और दुख की परिभाषा नियम नया लगाने लगे हैं। अपने और पराये...
■बालश्रम निषेध दिवस [12 जून] पर विशेष कविता : देवेश द्विवेदी ‘देवेश’ [लखनऊ]● 4 years ago ♀ बाल मजदूर विवश होकर लुटा बचपन हो गया जवान उम्र से पहले ही देख न पाया रास्ता विद्यालय का सुन न सका शिक्षा की...
■छत्तीसगढ़ी कविता : अशोक पटेल ‘आशु’ [ शिवरीनारायण,छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ हरियर बनाबो ग चल धरती ल हरियर बनाबो ग चल धरती ल सुग्घर बनाबो ग चल धरती ल नांन्हे-नांन्हे बिरवा लगाबो जुर-मिल के सब...
■कविता आसपास : डॉ. मंजुला पांडे [नैनीताल-उत्तराखंड]● 4 years ago ♀ बारिश बारिश आती है जब जब भगा देती है मेरे मन के आंगन के सूनेपन को महसूस करती हूं अपने आप में एक खुशबू...