poetry

■कल से लेकर आज़ तक : छत्तीसगढ़ी कविताओं में वसंत. ■अरुण कुमार निगम[दुर्ग].

भारतवर्ष में तीन मुख्य ऋतुएँ ग्रीष्म, वर्षा और शीत होती हैं। चार उप-ऋतुएँ भी होती हैं - शरद, हेमन्त, शिशिर और बसंत। इन सब ऋतुओं...

■कविता आसपास : समीर उपाध्याय.

♀ रूह मिलन की ऋतु : वसंत. ♀ समीर उपाध्याय. [ चोटीला, जिला-सुरेन्द्र नगर,गुजरात ] वासंती वैभव की छटा है निराली। चारों दिशाओं में बहार...

■भावांजलि : लता मंगेशकर.

♀ गीता विश्वकर्मा 'नेह' स्वर की देवी सुर साम्राज्ञी लता दीदी तुम थी तो खूब । मेरे अधरों पर थे प्यारे गाए तेरे गीत रसीले,...

■’रोज़ डे’ पर उत्खनन मिली 1997 की सतह पर एक पुरानी कविता- शरद कोकास.

उपहार में दी जाने वाली नाज़ुक वस्तुओं के साथ अपेक्षाएँ जुड़ी होती है जो कभी नहीं टूटती बेरोज़गारी के दिनों में जेबखर्च से पैसे बचाकर...

■स्वरांजलि : सुर की लता-लता मंगेशकर.

■कहीं नहीं गई हो ■पूनम पाठक 'बदायूँ' [ इस्लामनगर,बदायूँ,उत्तरप्रदेश ] कहीं नहीं गई हो = पहाड़ों में नदियों में पेड़ों में लताओं में गूंजेगी सदा...

■स्वरांजलि : सुर की लता-लता मंगेशकर.

■लता मंगेशकर ■डॉ. नीलकंठ देवांगन [ शिवधाम कोडिया,जिला-दुर्ग,छ. ग. ] स्वर साम्राज्ञी कोकिल कंठी स्वर की रानी सुरमल्लिका गायन कला में पारंगता जगतीतल की शीतलता...
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