■’कोशिश’ स्तम्भ : श्याम निर्मोही [ बीकानेर राजस्थान ] 4 years ago 1. पिता शब्द की परिभाषा तब समझ नहीं पाया था वो सख़्त स्वभाव वो आपकी बाहरी कठोरता और आपका वो लहज़ा हमेशा कानों को कर्कश...
■राजिम मेला पर विशेष : केवरा यदु ‘मीरा’ [राजिम-छत्तीसगढ़]. 4 years ago ♀ मोर संगी चलना ♀ केवरा यदु 'मीरा' चल संगी चलना राजिम मेला जाबो। राजिम लोचन के दरस करि आबो। मांघी पुन्नी आगे अऊ मेला...
छात्रा दीक्षा समुद्र द्वारा 15 फरवरी 2022 को किये गए सुसाइड समाचार ‘दैनिक भास्कर’ में पढ़कर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीआईडी रायपुर के नरेन्द्र सिक्केवाल के मन के उदगार कविता में पढ़िए 4 years ago ♀ दीक्षा समुद्र ♀ नरेन्द्र सिक्केवाल मेरी बेटी तूने क्यों कर लिया 'डिसाइड' अचानक करने का 'सुसाइड' केवल इतनी सी बात पर कि 'वेलेंटाइन डे'...
■बसंत रितु के गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर. 4 years ago मोर हिरदे के भँवरा ह गुनगुनावत हे मया के दवना ह महमहावत हे बसंती पुरवाही करत हे चारी रंगे के दिन आगे बही तोर पारी...
■वसंत ऋतु पर दो कविताएं : ■देवेश द्विवेदी ‘देवेश’. 4 years ago ♀ वसंत मञ्जरी लगी आमों पर कोयल भी गान करे भंवरा भी गुनगुनाय आला वसन्त है। वसन्ती बयार चले नदिया भी खिलखिलाय धरती के अधरों...
■कविता आसपास : डॉ. कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव. 4 years ago ♀ कोरोना सुन ले मेरी ♀ डॉ. कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव [ जालौन,उत्तरप्रदेश ] दुष्ट कोरोना अब तू सुन तेरी अब तो आफत आई । मास्क...
■छतीसगढ़ी कविता : डॉ. बलदाऊ राम साहू. 4 years ago ♀ बसंत आ गे ♀ डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग,छत्तीसगढ़ ] देखौ जी, रितु बसंत आ गे, धरती के मन हरसागे। आमा रूख मा...
■कल से लेकर आज़ तक : छत्तीसगढ़ी कविताओं में वसंत. ■अरुण कुमार निगम[दुर्ग]. 4 years ago भारतवर्ष में तीन मुख्य ऋतुएँ ग्रीष्म, वर्षा और शीत होती हैं। चार उप-ऋतुएँ भी होती हैं - शरद, हेमन्त, शिशिर और बसंत। इन सब ऋतुओं...
■इस माह के कवि : समीर उपाध्याय [गुजरात]. 4 years ago ♀ हिंद की रूह है हिंदी. हिंद की रूह है हिंदी। संस्कृत की बख़्शीश है हिंदी। इंसानियत का पैग़ाम है हिंदी। हिंद की रूह है...
■कविता आसपास : समीर उपाध्याय. 4 years ago ♀ रूह मिलन की ऋतु : वसंत. ♀ समीर उपाध्याय. [ चोटीला, जिला-सुरेन्द्र नगर,गुजरात ] वासंती वैभव की छटा है निराली। चारों दिशाओं में बहार...