poetry

■कविता आसपास : •तारकनाथ चौधुरी.

●पावस पथिक -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई-छत्तीसगढ़] अंजान देश के तुम हे पथिक! पावस ठहरो इस धाम तनिक! तपते जब तन-मन तपती धरा हो जाती कृश...

■ग़ज़ल : •गोविंद पाल.

●आदमी अब इस कदर गिर गये 'गोविंद' ●जिंदगी एक फटे हुए कैलेंडर हो गये. -गोविंद पाल [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] पोखर के हैसियत वाले आज समंदर...

■ग़ज़ल : डॉ. अमर पंकज.

●मौत से चाहे तुम डर लो,मैं अपनी बात कहूंगा. ●जिसको जो करना है कर लो,मैं अपनी बात कहूंगा. -डॉ. अमर पंकज. [ दिल्ली विश्वविद्यालय ]...

■कविता : जितेन्द्र ‘कबीर’.

●ईमानदारी का डंडा. -जितेन्द्र 'कबीर'. [ चम्बा-हिमाचल प्रदेश ] चुनाव में हर एक ईमानदार, निष्पक्ष व सजग उम्मीदवार एक संभावित 'डंडा' है राजनीतिज्ञों की खुशामद...

कविता : मजबूर मजदूर है. -ललित पाल सिंह अर्कवंशी.

[ हरदोई उत्तरप्रदेश के ललित पाल सिंह अर्कवंशी की पहली रचना 'छत्तीसगढ़ आसपास' के पाठकों/वीवर्स के लिए प्रस्तुत है. पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर रचनाओं का...
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