बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] 2 years ago 🟥 फरा कनकी पिसान म नून डार के कस के सान ले पानी डार के दुनो हाथ म तैं ओला बर ले बर बर के...
बाल कविता : कमलेश प्रसाद शर्माबाबू [कटंगी-गंडई, जिला- केसीजी, छत्तीसगढ़] 2 years ago 🟥 साबुन सुघ्घर-सुघ्घर प्यारा साबुन। सबके हवय दुलारा साबुन।। बढ़िया काम आथे साबुन। साफ सफाई बनाथे साबुन।। रंग-बिरंग के आथे साबुन। खुशबू दे ममहाथे साबुन।...
बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर 2 years ago 🟥 ढेखरा बारी बखरी म कोहड़ा सेमी लगा ले नार के चढ़े बर बने ढेखरा गड़िया ले ढेकरा के परसादे नार ह उपर चढ़थे दिन...
कहानी : उर्मिला शुक्ल 2 years ago 🟥 अम्मा की डोली - उर्मिला शुक्ल [ रायपुर छत्तीसगढ़] डोली सजानी है मुझे | अम्मा की डोली| उन्हें विदा करना है | कैसे कर...
कविता : पूनम पाठक बदायूं 2 years ago 🟥 आदिवासियों को विकसित बनाएं - पूनम पाठक बदायूं [ इस्लामनगर उत्तरप्रदेश ] आदिवासियों को विकसित बनाएं = आदिवासी जंगल के हैं संरक्षक कब तक...
बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर 2 years ago 🟥 हमर गवंई गाँव सरग ले सुग्घर हमर गवँई गाँव जिहां आमा अमली के जुड़ छांव गाँव वाले मन करथे मन भर खेती खेती ला...
विशेष अवसर विशेष कविता : अरुण कुमार निगम 2 years ago 🟥 वासंती फरवरी - अरुण कुमार निगम [ दुर्ग छत्तीसगढ़ ] कम-उम्र बदन से छरहरी लाई वसंत फिर फरवरी। शायर कवियों का दिल लेकर शब्दों...
कहानी : संतोष झांझी 2 years ago 🟥 अनुबंध -संतोष झांझी [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] शान्ता बालकनी में खड़ी सामने बाग में खेलते बच्चों को देख रही थी। घर से पुरानी साड़ी लाकर...
कवि और कविता : डॉ. प्रेम कुमार पाण्डेय 2 years ago 🟥 एक चिरैया एक चिरैया, दबा चोंच में ले आई इक तिनका| बड़ी अकड़ से, मेरे घर में रख छोड़ा कुछ धुनका|| रोज़- रोज़ फुर्र-...
बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर [ भिलाई छत्तीसगढ़ ] 2 years ago 🟥 चना होरा हरियर हरियर दिखय खेत खार ह फर म झूले रहिथे चना के डार ह गदेली चना ल हम्मन भूंजथन इही ल हम्मन...