बाल कविता : कमलेश प्रसाद शर्माबाबू [कटंगी-गंडई, जिला- केसीजी, छत्तीसगढ़]
🟥 साबुन सुघ्घर-सुघ्घर प्यारा साबुन। सबके हवय दुलारा साबुन।। बढ़िया काम आथे साबुन। साफ सफाई बनाथे साबुन।। रंग-बिरंग के आथे साबुन। खुशबू दे ममहाथे साबुन।...