कविता आसपास : गणेश कछवाहा [रायगढ़ छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 1. मैं चलूंगा हां अकेले ही चलूंगा ज़रूर चलूंगा।। पैरों पर छाले ही तो पड़ेंगे मुझे भूखे,नंगे पांव ही चलने दीजिए एक नया इतिहास रचने...
कविता आसपास : दिलशाद सैफी 3 years ago 🌸 सियासी रंग - दिलशाद सैफी [ रायपुर छत्तीसगढ़ ] मारो मारो और मारो बहा दो लहू इनका ये तो कमज़र्फ़ है,बेगैरत भी इन कमबख़्तो...
कविता आसपास : तारक नाथ चौधुरी 3 years ago 🌸 चलो इक बार फिर से... - तारक नाथ चौधुरी [ चरोदा भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] चलो इक बार फिर विश्वास का दीपक...
कविता आसपास : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश] 3 years ago 🌸 सूरज अंधेरे से परेशान सूरज कल ही अपनी आभा खो बेचैन भागता हुआ थका-हारा चला गया था संध्या के साथ शयन कक्ष में चिंतन...
रचना आसपास : श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव 3 years ago 🌸 हास्य व्यंग्य : मुस्कुराने की वजह - दीप्ति श्रीवास्तव [ चौहान टाउन, जुनवानी भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] अब क्या बतायें जनाब आज...
रचना आसपास : बलदाऊ राम साहू 3 years ago 🌸 मंजिल पाना है - बलदाऊ राम साहू [ आदर्श नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] आगू-आगू चलके भइया मंज़िल पाना हे लेके सुग्घर भाव जगत मा...
कविता आसपास : डॉ. मंजुला पांडेय [हल्दवानी, जिला – नैनीताल, उत्तराखंड] 3 years ago 🌸 मेरे अपने भागता रहा जिंदगी भर तलाशता रहा सुकून चला गया दूर बहुत दूर छोड़कर शांत एकांत प्रकृति का साथ उड़ते घनेरे बादल हरे-भरे...
वर्षा ऋतु विशेष : मिलन की रूत आ गई है… – एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘ [भिलाई, छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 🌸 मिलन की रूत आ गई है... जेठ की तपन से बाग बगीचे झुलसे धरा बेचैन हो तड़फने लगी थी फहराती हुई गेसुएं काली घटा...
ईद पर विशेष : ग़ज़ल : नवेद रज़ा दुर्गवी 3 years ago 🌸 गिले शिकवे मिटे हम वो रुका इस ईद पर भेजे... - नवेद रज़ा दुर्गवी { केलाबाड़ी, दुर्ग, छत्तीसगढ़ } 1)गिले शिकवे मिटे हम वो...
विशेष : शादी की 32वीं सालगिरह पर पत्नी के नाम… डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरी, आंध्रप्रदेश] 3 years ago प्रिये तुम मेरे कोट की बाईं ओर लगी अधखुली कली-सी परिणय के बाद आई थी जीवन में कल्पवृक्ष की तरह। मेरे सुख-दुख की संगी-साथी मेरी...