5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : शुचि ‘ भवि ‘ 3 years ago •विश्व पर्यावरण दिवस सुनो चीत्कार तुम भी तो सुनो मैंने सुनी है वृक्ष की है अश्क,ज़ख़्म,फ़ुगां सब देखे आज मैंने उसके तुम भी तो देखो,,...
अंतरराष्ट्रीय साइकिल दिवस पर दो बाल कविता – बलदाऊ राम साहू 3 years ago •मेरी साइकिल मेरी साइकिल बड़ी निराली, रंग - बिरंगी, नीली - काली। चलती है वह सरपट, सर-सर, मैं दौड़ाऊँ इसे सड़क पर। इससे मेरी मीत...
कविता आसपास : डॉ. अंजना श्रीवास्तव [भिलाई, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 मौत का खाका चौबीस घंटे भी अब बहुत बड़े लगने लगे हैं । समय अब काटे नही कट रहा है । क्या करें ?...
कविता आसपास : रंजना द्विवेदी { रायपुर छत्तीसगढ़ } 3 years ago 🌸 मेरा तुम्हें इतना समझना क्या काफी न था.... मेरा तुम्हे इतना समझना क्या काफी न था और क्या समझना बाकी था मुझे लगा हम...
साहित्य आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 अचार मौसम आया आम का अचार बनाने की जुगत में लग गई हूं स्वयं के हाथ के अचार में मां के जैसे बनाये अचार...
कविता आसपास : रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 आईना एक दिन आईने के सामने गई सोचा थोड़ा संवार लूं खुद को बहुत अरसा हुआ थोड़ा निहार लूं खुद को जानती थी आईना...
कविता आसपास : संध्या श्रीवास्तव [भिलाई – दुर्ग, छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 मैं इक बेजुबाँ फूल मैं इक बेजुबां फूल.... बागों में खिल कर भी तुम्हारे दिल की हर बात समझ जाता हूं मैं नैतिक बंधन...
गीत : श्रीमती आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 स्मृतियों के झरोखों से स्मृतियों के झरोखों से मैंने देखा जो बीता कल । याद आने लगे मुझे अच्छे बुरे खट्टे मीठे पल ।...
कविता : स्नेहा गोयल [रांची झारखंड] 3 years ago 🌸 माँ माँ, शब्द में ही एक जादू है, इसको बोलते ही सारी तकलीफ़ें पल में ग़ायब हो जाती है। माँ, जन्म देकर मुझे ख़ुद...
कविता : रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 धीरज तो रख धीरज ,,,,, फूल तो झड़ेंगे फिर भी कली आएगी जो फिर से एक बार मुस्कुराएगी पतझड़ के बाद जीवन में बसंत...