■कविता आसपास : जयराम जय [ कानपुर, उत्तरप्रदेश ] 4 years ago ♀ पिता पिता दिवस क्यों लोग मनाते हमको समझ न आया सिर्फ पीटते ढ़ोल एक दिन कैसी जग की माया बिना पिता के एक दिवस...
■बाल दोहे : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ [ रायपुर, छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ मिश्का के संग मिल जाता है अनगिनत , लम्हों का आनंद। कटता है हर एक पल , जब मिश्का के संग।। गोदी में ही...
■21 जून योग दिवस पर विशेष दोहा ग़ज़ल : ललित पाल सिंह अर्कवंशी [हरदोई, उत्तरप्रदेश] 4 years ago ♀ दोहा ग़ज़ल जो भी नर नारी सदा,करता नियमित योग। शारीरिक अरु मानसिक, होत न कोई रोग।। इक्कीस जून विश्व में ,योग दिवस कहलाय। रामदेव...
■छत्तीसगढ़ी कविता : कु.धारणी सोनवानी. 4 years ago ♀ मोर छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के अद्भुत लीला , इँहा हावै बत्तीस जिला प्यार अउ बिसवास हे। मन मा अब्बड़ आस हे । इहाँ होथे अड़बड़...
■कविता : डॉ. बलदाऊ राम साहू. 4 years ago ♀ पिता पिता आज आजमाने लगे हैं राह कठिन बताने लगे हैं। सुख और दुख की परिभाषा नियम नया लगाने लगे हैं। अपने और पराये...
■बालश्रम निषेध दिवस [12 जून] पर विशेष कविता : देवेश द्विवेदी ‘देवेश’ [लखनऊ]● 4 years ago ♀ बाल मजदूर विवश होकर लुटा बचपन हो गया जवान उम्र से पहले ही देख न पाया रास्ता विद्यालय का सुन न सका शिक्षा की...
■छत्तीसगढ़ी कविता : अशोक पटेल ‘आशु’ [ शिवरीनारायण,छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ हरियर बनाबो ग चल धरती ल हरियर बनाबो ग चल धरती ल सुग्घर बनाबो ग चल धरती ल नांन्हे-नांन्हे बिरवा लगाबो जुर-मिल के सब...
■कविता आसपास : डॉ. मंजुला पांडे [नैनीताल-उत्तराखंड]● 4 years ago ♀ बारिश बारिश आती है जब जब भगा देती है मेरे मन के आंगन के सूनेपन को महसूस करती हूं अपने आप में एक खुशबू...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष ग़ज़ल : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 4 years ago ♀ जब तक जल है जबतक भूमंडल में जल है तबतक जीवन में मंगल है तोड़ मिलेगा हर संकट का इसमें हर दुविधा का हल...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष बाल कविता : तारकनाथ चौधुरी. 4 years ago ♀ गोलू और दादाजी जब गोलू बोला- दादाजी इस बार हमें भी गाँव ले चलो। बूढे़ बरगद बाबा की तुम छाँव ले चलो।। देखेंगे हम...