■कल से लेकर आज़ तक : छत्तीसगढ़ी कविताओं में वसंत. ■अरुण कुमार निगम[दुर्ग]. 5 years ago भारतवर्ष में तीन मुख्य ऋतुएँ ग्रीष्म, वर्षा और शीत होती हैं। चार उप-ऋतुएँ भी होती हैं - शरद, हेमन्त, शिशिर और बसंत। इन सब ऋतुओं...
■इस माह के कवि : समीर उपाध्याय [गुजरात]. 5 years ago ♀ हिंद की रूह है हिंदी. हिंद की रूह है हिंदी। संस्कृत की बख़्शीश है हिंदी। इंसानियत का पैग़ाम है हिंदी। हिंद की रूह है...
■कविता आसपास : समीर उपाध्याय. 5 years ago ♀ रूह मिलन की ऋतु : वसंत. ♀ समीर उपाध्याय. [ चोटीला, जिला-सुरेन्द्र नगर,गुजरात ] वासंती वैभव की छटा है निराली। चारों दिशाओं में बहार...
■भावांजलि : लता मंगेशकर. 5 years ago ♀ गीता विश्वकर्मा 'नेह' स्वर की देवी सुर साम्राज्ञी लता दीदी तुम थी तो खूब । मेरे अधरों पर थे प्यारे गाए तेरे गीत रसीले,...
■’रोज़ डे’ पर उत्खनन मिली 1997 की सतह पर एक पुरानी कविता- शरद कोकास. 5 years ago उपहार में दी जाने वाली नाज़ुक वस्तुओं के साथ अपेक्षाएँ जुड़ी होती है जो कभी नहीं टूटती बेरोज़गारी के दिनों में जेबखर्च से पैसे बचाकर...
■स्वरांजलि : सुर की लता-लता मंगेशकर. 5 years ago ■कहीं नहीं गई हो ■पूनम पाठक 'बदायूँ' [ इस्लामनगर,बदायूँ,उत्तरप्रदेश ] कहीं नहीं गई हो = पहाड़ों में नदियों में पेड़ों में लताओं में गूंजेगी सदा...
■स्वरांजलि : सुर की लता-लता मंगेशकर. 5 years ago ■लता मंगेशकर ■डॉ. नीलकंठ देवांगन [ शिवधाम कोडिया,जिला-दुर्ग,छ. ग. ] स्वर साम्राज्ञी कोकिल कंठी स्वर की रानी सुरमल्लिका गायन कला में पारंगता जगतीतल की शीतलता...
■बसंत पंचमी पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू. 5 years ago ♀ रितु बसंत जब आथे ♀ डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] रितु बसंत हर जब-जब आथे तब-तब सुख के भान कराथे। आमा मउरे ...
■बसंत पंचमी पर विशेष : गीता विश्वकर्मा ‘नेह’ 5 years ago ♀ सरस्वती वंदन, हरिगीतिका छंद ♀ गीता विश्वकर्मा 'नेह' [ बालको नगर कोरबा,छत्तीसगढ़ ] वंदन करूँ, अर्चन करूँ,माँ शारदे वरदान दे, स्वर,ताल,अनहद-नाद,लय मृदु-वाक्पटु मधु गान...