■कुकुभ छंद : केवरा यदु ‘मीरा’ 4 years ago ♀ छेरछेरा ♀ केवरा यदु 'मीरा' [ राजिम,छत्तीसगढ़ ] सुनौ छेरछेरा आगे गा, लइकन झोला धर आथे। छेरिक छेरा दे दे दाई,कहिके जम्मों चिल्लाथे।। मींजे...
■छेरछेरा पर विशेष छतीसगढ़ी कविता : ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’ 4 years ago ♀ छेरछेरा : हमर दानसीलता ल दरसाथे ♀ ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' [ सुरगी,राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ ] धान के कटोरा ,छत्तीसगढ़ ल कहे जाथे. इहां किसम किसम...
■कविता आसपास ■रेवा जी चोलकर 4 years ago ♀ माँ ♀ रेवा जी चोलकर [ इंदौर-मध्यप्रदेश ] मां??? मुझे अपनी ममता के आंचल से क्यों? गिरा दिया;? जिस गोद में मुझे पलना था...
■बचपन आसपास. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ■मिश्का के रंग ढंग ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' 【 कोरबा,छत्तीसगढ़ 】 ● देखने लायक हो गए मिश्का के रंग ढंग नाना के संग इनदिनों उड़ा...
■मकर संक्रांति पर विशेष : ■ललित पाल सिंह अर्कवंशी 5 years ago ■खिचड़ी की दावत ■ललित पाल सिंह अर्कवंशी [ अगौलपुर-हरदोई,उत्तरप्रदेश ] सासू जी एक दिन फोन किहिन, भइया जी घर पर आई जाउ।। नाती बिटियउ का...
■मकर संक्रांति विशेष : कविता आसपास – तारकनाथ चौधुरी. 5 years ago ■बार-बार कटी पतंग. ■तारकनाथ चौधुरी. [ चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़ ] जब भी उडी़ मेरी खुशियों की पतंग आसमाँ में जाने कहाँ से तेज़ माँजे से सजे...
■मकर संक्रांति विशेष : कविता आसपास – दीप्ति श्रीवास्तव. 5 years ago ■मकर संक्रांति ■दीप्ति श्रीवास्तव तिल - गुड़ हमेशा से बचपन दोस्त है पक्के मिलते तो धौल जमाते एक-दूजे संग लिपट जाते दुनिया से क्या लेना-देना...
■कविता आसपास : विजय कुमार तिवारी [ भुनेश्वर-ओडिशा ] 5 years ago ■दुखराग उस नन्ही सी बच्ची को देखो, खुश है कि कोई देख रहा है उसे, सहला,पुचकार रहा है,खेल रहा है उसके साथ। बस,इतना ही करना...
■रचना आसपास. ■रंजना मजूमदार. 5 years ago 【 ●दिल्ली निवासी रंजना मजूमदार की 'डाली के फूल' [हिंदी काव्य संग्रह] औऱ 'फायरफ्लाई Firefly' [अंग्रेजी काव्य संग्रह] के अलावा 4 सांझा संग्रह प्रकाशित हो...
■नवा बछर के गजब बधाई ■डॉ. बलदाऊ राम साहू 5 years ago नवा साल मा खुसी मनाबो जिनगी के परबत चढ़ जाबो। नवा बछर हर जे दिन आही सुख-समृद्धि ला ले के आही। नवा उदमी हम करबो...