■मकर संक्रांति विशेष : कविता आसपास – तारकनाथ चौधुरी.
5 years ago
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■बार-बार कटी पतंग.
■तारकनाथ चौधुरी.
[ चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़ ]
जब भी उडी़
मेरी खुशियों की पतंग
आसमाँ में
जाने कहाँ से
तेज़ माँजे से सजे
सैकडो़ं पतंग चले आये
उसे काटकर
क्षत-विक्षत करने
और अव्यक्त पीडा़ को
हृदय में छुपाये
जुट गया,नई पतंग बनाने में।
जानता हूँ इस बार भी
मेरी पतंग आसमाँ पर ही
काट दी जायेगी
क्योंकि आया नहीं मुझे
धारदार माँजे बनाना
अब तक
और न सीख पाया
पेंच लडा़ने के तरीके।
■कवि संपर्क-
■83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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