■साहित्य आसपास. ■गीता विश्वकर्मा ‘नेह’. 5 years ago ♀ ग़ज़ल ♀ गीता विश्वकर्मा 'नेह' [ बालको नगर,कोरबा,छत्तीसगढ़ ] लोग अक्सर वो ज़माने से ख़फा होते हैं, जिनके अरमान अधूरे से सदा होते हैं...
■नव वर्ष आगमन पर विशेष. ■डॉ. नीलकंठ देवांगन. 5 years ago ♀ मुबारक हो नया साल. ♀ डॉ. नीलकंठ देवांगन. [ शिवधाम कोडिया,जिला-दुर्ग,छ. ग. ] खुशियों की लेकर थाल आया है नया साल नव स्वागत करो...
■नव वर्ष आगमन पर विशेष. ■ललित पाल सिंह अर्कवंशी. 5 years ago ■मुबारक सभी को नया साल हो. मुबारक सभी को यह नया साल हो। भरे खुशियों से झोली ये वो साल हो।। सुखी जग हो मेरा...
■कविता आसपास : सवि शर्मा. 5 years ago ♀ पाषाण ♀ सवि शर्मा [ देहरादून, उत्तराखंड ] बदल जाते है आयाम जीवन के यदि नही करते विवेचना जीवन के अर्थों की निर्विकार से...
■कविता आसपास ■तारक नाथ चौधुरी 5 years ago ♀ शीत-ऋतु की दो कविताएं ■1. ग्रीष्म गई जलते-भुनते और बरखा रोते-रोते। अब तो आ गई शीत ऋतु, चलो ओढ़ रजाई सोते।। * सूरज क्या...
■बाल मुक्तिका. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ♀ मेरी मम्मी ♀ डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ जमनीपाली, जिला-कोरबा,छ. ग. ] हँसती और हँसाती है मेरा मन बहलाती है हार कभी ना मानेंगे...
■साहित्य आसपास : पूनम पाठक ‘बदायूँ’. 5 years ago ♀ कभी मौन भी ♀ पूनम पाठक 'बदायूँ' [ इस्लामनगर बदायूँ,उत्तरप्रदेश ] कभी मौन भी हो सकता है बेअसर भले स्वर अनोखा भाषा अलग मौन...
■बचपन आसपास ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ■कुल्फी खाते हैं. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'. [ जमनीपाली,जिला-कोरबा,छ. ग. ] डॉक्टर से घबराते हैं रोज़ दवाई लाते हैं बीपी सुगर है फिर भी नाना...
■बचपन आसपास. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ♀ अनुकृति ● निश्छल ,कोमल ,अभिवृत्ति ईश्वर की अनुपम कृति हाथों में बेलून लिए खेल रही है अनुकृति ● श्वेत वस्त्र में अनुकृति लगती है...
■बचपन आसपास. ■डॉ. बलदाऊ राम साहू. 5 years ago ♀ मन करता है. ♀ डॉ. बलदाऊ राम साहू. [ आदर्श नगर,जिला-दुर्ग,छ. ग. ] मन करता है पंछी बनकर आसमान में उड़ जाऊँ तारों के...