■बाल मुक्तिका. ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’.
5 years ago
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♀ मेरी मम्मी
♀ डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’
[ जमनीपाली, जिला-कोरबा,छ. ग. ]
हँसती और हँसाती है
मेरा मन बहलाती है
हार कभी ना मानेंगे
मम्मी रोज़ सिखाती है
करती है तैयार मुझे
फिर वो दूध पिलाती है
शाम ढले घर के आगे
अपने साथ घुमाती है
मेरे धूम मचाने पर
धीरे से मुसकाती है
खेला करती है मुझसे
यूँ ही डाँट लगाती है
भोली है मेरी मम्मी
बारंबार रिझाती है
■कवि संपर्क-
■94241 41875
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chhattisgarhaaspaas
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