poetry

■बचपन आसपास •तारक नाथ चौधुरी.

●हम तीन -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा,भिलाई-छत्तीसगढ़ ] चुप-चुप रहते हैं बडे़ भैय्या सबकी सुनते हैं बडे़ भैय्या जो माँगो वो ला देते हैं, पापा जैसे...

■कविता आसपास : •अमृता मिश्रा.

●तीसरा प्रहर तो नहीं ? -अमृता मिश्रा [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] तीसरा प्रहर समय चक्रवत सा निरन्तर है चलायमान और उसकी परिधि पर क्रमवार दिवा- रात्रि...

■रचना आसपास : •डॉ. पीसी लाल यादव.

●धनबहार -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई, छत्तीसगढ़ ] मुस्कावत हवय धनबहार, अंग भर ओरमाये घुंघरू। सोन-सोन के गहना पहिरे, का नई लागत होही गरु...

■कविता आसपास : •तारक नाथ चौधुरी.

●बेबस पेड़ -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़ ] चिकित्सालय परिसर में, बरसों से तनकर खडा़ वो पेड़ अचानक भरभरा कर गिर पडा़..... उसके गिरने का...

■हिन्दकी-पीछे से वार करता है : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’.

●इल्तिज़ा बार-बार करता है. ●रोज़ पीछे से वार करता है. -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] इल्तिज़ा बार - बार करता है रोज़ पीछे...

माँ का कोई एक दिन नहीं होता,माँ वो है जिसके बिना कोई दिन नहीं होता ! मातृ दिवस के दिन मन के कुछ भाव समर्पित करती हुई-अमृता मिश्रा.

●तेरा मेरा रिश्ता -अमृता मिश्रा [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] मेरे हर दर्द की आहट तुम्हें महसूस हो जाती हैं, मेरी चाहतें तेरे आँचल के साये में...
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