■स्तम्भ : नवोदित रचनाकार. •श्रीमती सुभद्रा कुमारी. 5 years ago ●अकेले रह गये -सुभद्रा कुमारी चेहरे पर खुशी देखकर कभी आईने भी बिखर गये, आंखों से जो आंसू टपके सारे अरमान जाने किधर गये ।...
■ग़ज़ल : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ●ग़ज़ल- ग़म नहीं होगा -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] शम्मा से दूर रहोगे तो ग़म नहीं होगा फ़िजूल आग में जलने का भ्रम...
■कविता आसपास : ●सुधा वर्मा. 5 years ago ●बादल -सुधा वर्मा [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] बादल का एक टुकड़ा घूमते घूमते दूर जंगल तक चला गया। करंज पीपल को निहारता रहा, करंज ने कहा...
■इस माह के कवि : ●गोविंद पाल 5 years ago ●कुकुरमुत्ते अगरनंददुलारेनहोते तोनिराला"निराला"नहींहोता पंत"पंत"नहींहोताअगरबक्शीनहींहोते जमानावोथाजबहीरेभीथेऔरजौहरीभी कुछहीरेकोअवश्यवक्तलगा जौहरीतकपहुंचनेमें परहीरेनेहीहीरेकाकद्रकिया मुक्तिबोधनेजानाशमशेरको औररामविलासनेमुक्तिबोधको परमित्रों ! विकटपरिस्थितियोंकेबीच आजकेनजानेकितनेनिराला, पंत, मुक्तिबोध समयसेपहलेकालकेगर्तमेंसमागये अंधेरेकोठारीमेंउनकीअभिव्यक्तिकीचीख दफ़्नहोचुकी है अबकुछचमकनेवालापत्थरनगीनोंमें शुमारहोगयाहै बिडम्बनादेखिए पारखीनजरोंमेंभीखोटआगयाहै धाराकेविपरीतबहनेंकीहिम्मतनजुटापाने...
■बचपन आसपास •डॉ. बलदाऊ राम साहू. 5 years ago ●जंगल में स्कूल -डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] जंगल में स्कूल खोलने बंदर आगे आया इसको सुनकर शेर सिंह हाथ मला पछताया। बंदर...
■बचपन आसपास •तारक नाथ चौधुरी. 5 years ago ●हम तीन -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा,भिलाई-छत्तीसगढ़ ] चुप-चुप रहते हैं बडे़ भैय्या सबकी सुनते हैं बडे़ भैय्या जो माँगो वो ला देते हैं, पापा जैसे...
■कविता आसपास : •डॉ. अंजना श्रीवास्तव. 5 years ago ●अर्ज़ी -डॉ. अंजना श्रीवास्तव [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] एक दिन मैने भगवान से पूछा क्या आप मरने वालों की लिस्ट बना रहे है । उनमे कुछ...
■कविता आसपास : •अमृता मिश्रा. 5 years ago ●तीसरा प्रहर तो नहीं ? -अमृता मिश्रा [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] तीसरा प्रहर समय चक्रवत सा निरन्तर है चलायमान और उसकी परिधि पर क्रमवार दिवा- रात्रि...
■रचना आसपास : •डॉ. पीसी लाल यादव. 5 years ago ●धनबहार -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई, छत्तीसगढ़ ] मुस्कावत हवय धनबहार, अंग भर ओरमाये घुंघरू। सोन-सोन के गहना पहिरे, का नई लागत होही गरु...
■मया के बोली भाखा : •दुर्गेश सिन्हा ‘दुलरवा’ 5 years ago ●मन मयूरा तड़पे बनके चिरइया -दुर्गेश सिन्हा 'दुलरवा' [ छुरिया बंजारी,छत्तीसगढ़ ] मन मयूरा तड़पे बनके चिरइया। अपने देश म रावण भेष म, घुमाथे नारी...