ग़ज़ल- •दिलशाद सैफी 5 years ago ●जीते तो हमसब मिल, विजय पताका लहरायेंगे, हारे तो एक इतिहास बनके, पन्नों में रह जाएंगे. -दिलशाद सैफी [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] फिर देखो इतना गंभीर...
हज़ल- रामबरन कोरी ‘कशिश’ 5 years ago ●इम्तिहाँ हमने जवानी में, दिया था जो 'कशिश'उम्र, गुज़री मगर अब तक, न नतीज़ा निकला. -रामबरन कोरी 'कशिश'. जिसे समझा था पूरा वो अधूरा निकला...
रचना आसपास- सुधा पंडा. 5 years ago ●सब तरफ़ फैलावें जागरूकता पर्यावरण है हमारी आवश्यकता -सुधा पंडा [ घरघोड़ा-रायगढ़-छत्तीसगढ़] हम सबका ध्येय है कहना, पेड़ धरा की है सुंदर गहना। आओ !...
रचना आसपास- गोविंद पाल 5 years ago ●मैं जिंदगी का हर वो, किताबें आजकल पढ़ रहा हूं, जो मेरे आसपास, औऱ मेरे इर्दगिर्द है. -गोविंद पाल [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] पढ़ कर आगे...
रचना आसपास- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 5 years ago ●हिन्द की-अपने घर में रहें -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] वक़्त है बेरहम अपने घर में रहें ख़ुद पे करिए करम अपने घर...
■कविता आसपास ●मीता अग्रवाल ‘मधुर’. 5 years ago ●नवगीत -मीता अग्रवाल 'मधुर' [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] नित पसारे पाँव बैरी मौन घाती पर खदेड़े ज्वार भाटा सिंधु तट पर राहु ग्रसता जग लतेड़े। व्याधियों...
कविता आसपास- संतोष झांझी 5 years ago ●हिरनी के पांव थम गये [ 30 वर्ष पुरानी,छंद मुक्त पहली कविता ] एकदिन माँ की गोद से किलक कर उछली घुटनों के बल जमीन...
कविता आसपास- दिलशाद सैफी 5 years ago ●जंगल -दिलशाद सैफी [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] खामोशीयों में सिसकते हुए चिखते है कहने को है बेताब, ये धधकते हुए जंगल जलते है जब वो तड़प...
■कविता आसपास – •झरना मुख़र्जी 5 years ago ●बस मुट्ठी भर बताशा. -झरना मुखर्जी अंतर्मन में दबी हुई एक चीख सुनाई देती है फरियादों के खिड़की से सुन बस मौन सुनाई देती है...
श्रद्धांजलि : ●कवि मुकुंद कौशल. 5 years ago •कवि हार गया -डॉ. बलदाऊ राम साहू कवि जंग जीतने के लिए लिखता है कविता उसकी लेखनी में आस और विश्वास के होते हैं भाव...