कविता आसपास 5 years ago ■तुम वैसी ही हो मेरे लिए. -तारकनाथ चौधरी तुम वैसी ही हो मेरे लिए जैसे देह में आग,कंठ में गान, सरित में नीर,तूफां में तीर,...
शरद कोकास [ दो लम्बी कविताएं ‘देह’ औऱ ‘पुरातत्ववेत्ता’ के कवि ] 5 years ago ■छत्तीसगढ़ के सु-प्रसिद्ध कवि शरद कोकास ने 'एक अच्छी ख़बर' को मित्रों के साथ शेयर किया,जिसे हम अपने पाठकों,वीवर्स के लिए हु-ब-हु प्रकाशित कर रहे...
छत्तीसगढ़ी आसपास 5 years ago ■आगे पहुना बसंत -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़ ] पिरीत के पानी म मया के रंग घोरे, आगे पहुना बसंत देख तो रे ।...
कविता आसपास 5 years ago ■नया देश बनाना है -उज्ज्वल प्रसन्नो [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] आह्वान है यह मेरा नया देश बनाना है। श्रम से,लगन से,भव्य नया देश बनाना है।। तन,...
रचना आसपास 5 years ago ■अप्प दीपो भव -अरुण कुमार निगम [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] मशीखत के जहाँ जेवर वहाँ तेवर नहीं होते जमीं से जो जुड़े होते हैं उनके पर...
कविता आसपास 5 years ago ■रहनुमा -सरस्वती धानेश्वर 'सारा' अथाह पीड़ाओं का दंश अश्कों की गगरी हृदय का गहरा तल छिपे हुए कयी बीते पल अदृश्य सा उसका वजूद ओझल...
कविता 5 years ago ■शबरी -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया, जिला-कबीरधाम, छ. ग. ] राम राम की रटन लगाई। उम्र बिता तब दर्शन पाई।। प्रतिदिन राहे फूल बिछाती। राम...
कविता आसपास 5 years ago ■रीते पन से आक्रांत 'एकाकी लोग'. -कमल यशवंत सिन्हा रीतेपन से आक्रांत 'एकाकी लोग' सोशल मीडिया पर झूठी जिंदगी जी रहे 'एकाकी लोग' खुद से...
महुआई गंध 5 years ago ■पगडंडियों के आर-पार, ■बिखरे पलाश फूल. -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़ ] पगडंडियों के आर-पार, बिखरे पलाश फूल। जैसे सूखी नदी के - हों...
बाल ग़ज़ल 5 years ago बाल ग़ज़ल म्याऊँ म्याऊँ करती है ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग'. ■कोरबा-छत्तीसगढ़. म्याऊँ म्याऊँ करती है पर बिल्ली से डरती है जब भी घोड़ा आता है...