poetry

कविता आसपास- दिलशाद सैफी

●जंगल -दिलशाद सैफी [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] खामोशीयों में सिसकते हुए चिखते है कहने को है बेताब, ये धधकते हुए जंगल जलते है जब वो तड़प...

■कविता आसपास – •झरना मुख़र्जी

●बस मुट्ठी भर बताशा. -झरना मुखर्जी अंतर्मन में दबी हुई एक चीख सुनाई देती है फरियादों के खिड़की से सुन बस मौन सुनाई देती है...

कविता आसपास : •विजय पंडा

●वीर पुत्रों को नमन -विजय पंडा [ घरगोड़ा, रायगढ़, छत्तीसगढ़] मन मेरा क्षुब्ध है ! वह कायर, मन मष्तिष्क से विक्षिप्त हैं हमारे अपने रक्षकों...

होली पर विशेष- तारकनाथ चौधुरी

●ढोल-नगाड़े नहीं बजेंगे, ●अबकी बार होली में. -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा,भिलाई, छत्तीसगढ़ ] ढोल-नगाडे़ नहीं बजेंगे, अबकी बार होली में, रंग-फव्वारे नहीं उडे़ंगे, अबकी बार...

होली पर विशेष- संतोष झांझी

●फ़ागुन आये -संतोष झांझी [ भिलाई-छत्तीसगढ़] फागुन आये फागुन जाए वो मेरा फागुन लौटा ना डाली डाली अमरइया में कुहू कुहू बोली कोयलिया कोयलिया संग...

होली पर विशेष- डॉ. पीसी लाल यादव

●आगे होरी तिहार संगवारी -डॉ. पीसी लाल यादव [ गंडई-छत्तीसगढ़] आगे होरी तिहार संगवारी । मारो भर- भर रंग पिचकारी।। गोरी के गाल दिखे चिक्कन...
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