poetry

कविता- गोपाल कृष्ण पटेल

■बहु भी मुस्कुराना चाहती है. -गोपाल कृष्ण पटेल [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] बहु भी किसी की बेटी है, फिर क्यों इतना कष्ट पाती है। छोड़कर आई...

कविता- संतोष झांझी

•चोका जापानी कविता -संतोष झांझी [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] उसनें कभी कुछ भी नही कहा यह भी चुप कुछ कहा ही नही ये न कहेगी तुम...

कविता- सुधा वर्मा

●बादल -सुधा वर्मा [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] बादल का एक टुकड़ा घूमते घूमते दूर जंगल तक चला गया। करंज पीपल को निहारता रहा, करंज ने कहा...

कविता- सरोज तोमर

●फ़ागुन जैसा मन हुआ...! -सरोज तोमर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] जा बैरिन पुरवाई तू ,चुनरी से मत खेल , रेत-घरौंदे को रहा ,बचपन अभी सकेल ।...

बाल कविता ●तारकनाथ चौधुरी

●दाऊ कहो न ! -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई-छत्तीसगढ़ ] चारों तरफ पत्थर के जंगल, जल-धाराएँ भी हैं ओझल बात तुम्हारी मान के दाऊ चाहूँ पौध...

कविता -विनीता सिंह चौहान

●ढाई आखर प्रेम के -विनीता सिंह चौहान [ इंदौर-मध्यप्रदेश ] एक दूजे को दिल से जोड़ें, प्रेम के ढाई आखर। दिल का रिश्ता बनता मधुर,...

बचपन आसपास, डॉ. बलदाऊ राम साहू

पेड़ अगर फल-बीज़ न देते नदियां जल ना देतीं, कैसे बनते बाग-बगीचे, कैसी होती खेती. सोचो बच्चो ●डॉ. बलदाऊ राम साहू. [ ●दुर्ग-छत्तीसगढ़. ] पेड़...

ग़ज़ल, विनीता सिंह चौहान.

अब क़लम क्या नया लिखे, अल्फाजों में वही दर्द दिखे. -विनीता सिंह चौहान [ इंदौर-मध्यप्रदेश ] अब कलम क्या नया लिखे। अल्फाजों में वही दर्द...

कविता

धरा पर उतरो महेश्वर, औऱ जगत का दुःख हरो, शत्रु का विनाश करने, रुद्र रूप तुम धरो. ●तारकनाथ चौधुरी धरा पर उतरो महेश्वर और जगत...
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