poetry

कविता- संतोष झांझी

●बासंती बयार बासंती बयार हमें न सता न बालों को छू न आँचल उड़ा अमराई गदराई कोयल भी बौराई लगती है भली भली पेड़ों की...

कविता- कल्याणी तिवारी

●आओ लिखे हम शहीदों के नाम ●जो बन गये सितारों की शाम आओ लिखे हम शहीदों के नाम जो बन गये सितारों की शाम सीने...

ग़ज़ल- डॉ. बलदाऊ राम साहू

हुआ है अँधेरा न जाने इधर क्यूँ, नन्हा-सा दीया उधर तुम जला दो। कहानी पुरानी किताबों में है जो, जरा पढ़ केअब तुम हमें भी...

बचपन आसपास

●बसन्त के स्वागत में -डॉ. बलदाऊ राम साहू भँवरों का है गुंजार सखी बासंती रंग, बयार सखी. महुआ गंध बिखेर रहा है कर के सोलह...

गीत

● आओ । बैठ कर गीत लिखें -विजय पंडा आम्र बौर के नीचे आओ ! बैठ कर गीत लिखें ; हल्की - बहकी ठंड में...

बचपन आसपास

●हिंद की-युक्तिका ●धीरे से मुस्कुराती है -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' धीरे से मुस्काती है फिर वो रोती-गाती है हर सामाँ को फैलाने पहले ख़ूब जमाती...

गणतंत्र दिवस

●देखो ! आज़ गणतंत्र आया. -विजय पंडा देखो ! आज गणतंत्र आया! स्वर्ण मुकुट से सजा हुआ पहन कर वो फिर इठलाया परोसा शब्दों की...

बचपन आसपास

●सबसे प्रीत बढ़ाएँ -डॉ. बलदाऊ राम साहू आओ बच्चो एक सूर में जन,गण,मन हम गाएँ जय घोष का नाद करें और ध्वज अपना फहराएँ। छोड़े...

बचपन आसपास

●चारण बनकर गाएं -डॉ. बलदाऊ राम साहू आओ बच्चो हम सब मिलकर भारत का जय गान करें इसकी माटी चंदन जैसी झुककर इसे प्रणाम करें।...
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