पहलगाम [कश्मीर] में आतंकी हमले के बाद लिखी विशेष कविता – नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ 1 year ago ▪️ • नूरुस्सबाह खान 'सबा' ▪️ सोच रही हूँ 'पहलगाम' पे कविता लिखूँ... ये लिखते हुए कलम कांपती है ये लिखने को शब्द नहीं है...
ग़ज़ल आसपास : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ 1 year ago ❤ ग़ज़ल • मैं बादे 'सबा' हूँ, है किस्मत में गर्दिश. • मेरा कोई घर है न कोई ठिकाना. वफ़ाओं का जिन पर लुटाया ख़ज़ाना...
इस माह के कवि : केंद्रीय विद्यालय छत्तीसगढ़ के सरायपाली में पदस्थ, प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेम कुमार पाण्डेय 1 year ago ❤ जंग जंग को मैं पहचानता हूं छद्म रूपों को जानता हूं मुखौटों से परिचित हूं कोई भी हो कैसी भी हो किसी के बीच...
ग़ज़ल आसपास : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ 1 year ago ❤ ग़ज़ल महफ़ूज़ हूँ दुनिया के हरेक खौफ़ व ख़तर से वाबस्ता हुई जब से मैं अल्लाह के दर से वो और हैं जिनको है...
रचना आसपास : तारकनाथ चौधुरी 1 year ago ❤ ग़ज़ल ❤ - तारकनाथ चौधुरी ❤ छत्तीसगढ़ राज्य,चरोदा छोडो़, रहने दो। उनको कहने दो।। आदत हो गई है। हमको सहने दो।। दुःख के मेघों...
पर्व विशेष कविता : तारकनाथ चौधुरी [छत्तीसगढ़, भिलाई-चरोदा, जिला-दुर्ग] 1 year ago ▪️ मंगलमय हो पर्व फागुनी दीवाली-होली पर,मैंने लिखे थे कितने निबंध। दीप-पटाखों की बातें और रंगों के कितने छंद।। लिखता था मैं,पके फसल से आती...
🤣 होली विशेष : ‘आओ अब की होली में’ – डॉ. दीक्षा चौबे 1 year ago अंतस के भेद मिटाएँगे , आओ अब की होली में । हम गीत खुशी के गाएँगे , आओ अब की होली में ।। मन-आँगन में...
होली विशेष : ‘एकता और परंपराओं का संगम होली’ – यशांसु बघेल [अधिवक्ता] 1 year ago सूरज की मीठी धूप ने किया चेहरे को पीला, टेसू के फूलों से वातावरण लाल है। खेतों में सजा सरसों के पत्तों का हरा रंग,...
व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘लोकलहर’ के संपादक के 3 व्यंग्य 1 year ago 🤣 1. दिल्ली गरियारों की! देखी, देखी, इन सेकुलर बिरादरी वालों की शरारत देखी। जब से रेखा गुप्ता जी के सिर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री...
इस माह की कवयित्री : दिलशाद सैफी [रायपुर, छत्तीसगढ़] 1 year ago ▪️{1} बसंत ऋतु तुम जब आना बसंत ऋतु तुम आना और बिखरा देना बासंती रंग प्रकृति की काया पर तुम पतझड़ के अवसाद से उबार...