कविता आसपास : रंजना द्विवेदी 1 year ago • अंततः वो हार गई • रंजना द्विवेदी [ रायपुर छत्तीसगढ़ ] शीत ऋतु का समय घना कोहरा छा गया दिशाएं धवल उज्ज्वल हुई ओस...
रचना आसपास : पूनम पाठक ‘बदायूं’ 1 year ago • मानवीयता से ये दूर पैसे से अमीर होते हैँ /कहीं कुछ लोग हाँ पैसे से /मगर दिल से नहीं ख्याल रखते हैँ /अपनी सुविधा...
ग़ज़ल आसपास : सुशील यादव 1 year ago • ग़ज़ल • आदमी सा आदमी मुझको मिला नहीं है • सुशील यादव [ भिलाई : छत्तीसगढ़ ] इस शहर में दूध का कोई धुला...
गाँधी जयंती पर विशेष : जन कवि कोदूराम ‘दलित’ के काव्य मा गाँधी बबा : आलेख, अरुण कुमार निगम 1 year ago आज हमर देश महात्मा गाँधी के 155 वाँ जनमदिन मनावत हे। संगेसंग दुनिया के आने देश में मा घलो बापू जी के जयंती मनत हे।...
रचना आसपास : ओमवीर करन 1 year ago • गज़ल • ओमवीर करन [ भिलाई : छत्तीसगढ़ ] तुमको भुलाने में वक्त लगा है दिल को समझाने में वक्त लगा है गम छुपाने...
कवि और कविता : डॉ. सतीश ‘बब्बा’ 1 year ago • कविता : शव वाहन • डॉ. सतीश चंद्र मिश्र 'बब्बा' [ चित्रकूट, उत्तरप्रदेश ] जिसको तूने, समझा खिलौना, उसने तुझे पहले ही, बनाया है...
ग़ज़ल आसपास : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ 1 year ago 👉 नूरुस्सबाह खान 'सबा' [ •छत्तीसगढ़ दुर्ग की नूरुस्सबाह खान 'सबा' की पहली रचना 'छत्तीसगढ़ आसपास' में प्रकाशित की जा रही है. • 'सबा' इनका...
स्मृति शेष : स्व. ओमप्रकाश शर्मा : काव्यात्मक दो विशेष कविता – गोविंद पाल और पल्लव चटर्जी 2 years ago ▪️ तुम्हें कैसे भुलूं दोस्त! - गोविंद पाल कैसे भुलूं तुम्हें दोस्त! मेरे रग रग में जो बसे हो, जीवन के हर चुनौती को हर...
हरेली विशेष कविता : डॉ. दीक्षा चौबे 2 years ago ▪️ हरेली परब हरेली मानबो, पहिली हमर तिहार। गुरहा चीला भोग बर, गरमागरम उतार।। खोंचे डारा नीम के, बिपत टरे के आस।। खेती के औजार...
कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी 2 years ago ▪️ अंतर केवल इतना है तुम्हारे आँगन आज भी उतरती हैं गौरेया... अपनी मधुर चहचहाट से जगाती हैं तुम्हें और मेरी नींद टूटती है कागा...