poetry

इस माह की कवयित्री : छत्तीसगढ़ दुर्ग की प्रगतिशील विचारों की सुपरिचित कवयित्री विद्या गुप्ता

▪️ छोटा सा सवाल दो और दो...??? छोटा सा सवाल, दो और दो.....???? एक से नौ तक है सीढ़ियां..... जीरो लगाते हुए आकाश तक करना...

14 सितम्बर हिंदी दिवस पर विशेष दोहावली : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

▪️ दोहावली शीघ्र राष्ट्रभाषा बने जग में हो पहचान - दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर [ भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] जननी संस्कृत कोख से, जन्मी हिन्दी...

कविता : तारकनाथ चौधुरी

▪️ संग दोष - तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] रात भर जागकर बारी-बारी से सातों घरों की पहरेदारी करने वाले कालू की आर्तनाद...

शिक्षक दिवस पर विशेष रचना : ‘मैं शिक्षक हूँ’ – गीता ज़ुन्जानी

गुमनामी में रह कर हँसता छात्रों के भविष्य को गढ़ता रातों को भी जागता रहता मैं शिक्षक हूँ राह दिखाता गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह मैं...

साहित्यिक पत्रिका कवितायन में छत्तीसगढ़ [चरोदा-जिला दुर्ग] के सेवानिवृत्त व्याख्याता तारक नाथ चौधुरी

▪️ जीवन यात्रा भूमिष्ठ होते ही चल पडी़ थी मेरे जीवन की रेल शयनायनयुक्त,वातानुकूलित सर्वसुविधासज्जित नहीं बल्कि साधारण यात्री गाडी़ पर ही ठूँस दिया गया...

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

▪️ कुछ भी तो नहीं बदला कुछ भी नहीं बदला... मानव के प्रति मानव का आक्रोश सभ्यता के आँगन की सीमा लाँघकर सब कुछ युद्ध...

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

▪️ स्वगत [SOLILOQUY] देवताओं के देश में रहता हूँ, राक्षसों से लड़ता रहता हूँ आहत-पराजित होकर देवालयों पर लोटता हूँ। चुप रहकर ,चुप रहने वाले...

छत्तीसगढ़ आसपास साहित्य : कवि- पल्लव चटर्जी : बांग्ला में अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी

▪️ नींव - मूल कवि- पल्लव चटर्जी - अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी तुम सभी की मनोकामनायें पूर्ण हों,मूर्त रुप धरें,गगन छुएँ इसलिए चुपचाप स्वीकार लिया मैंने...
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