हिंदी ग़ज़ल : बलदाऊ राम साहू [दुर्ग छत्तीसगढ़] 3 years ago •जितने ताने - बाने थे सब तज के जाना है जितने ताने-बाने थे सब तज के जाना है, तीन हाथ की धरती ही तो एक...
रचना आसपास : दुर्गाप्रसाद पारकर [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 हमर सपना के छत्तीसगढ़ थूकेल अपन बेटी ल पूछथे - कस बेटी भेट मुलाकात म कका करा अपन सपना के छत्तीसगढ़ कइसे हो एला...
कविता आसपास : उमेश दीक्षित 3 years ago [ •प्रथम बटालियन भिलाई दुर्ग के उमेश दीक्षित ओज के कवि के रूप में विगत 30 वर्षों से सक्रिय हैं. •' अर्जन साहित्य समिति '...
रचना आसपास : गोविंद पाल 3 years ago ▪️ गज़ल जबसे अंधेरे से अंधेरों का गठबंधन हो गया, चोर, लुटेरे, बदमाशों का अभिनंदन हो गया। किसके भरोसे समंदर की थपेड़ों से लड़े कश्ती,...
छत्तीसगढ़ी कविता : दुर्गा प्रसाद पारकर [छत्तीसगढ़ भिलाई] 3 years ago ▪️ रिटायर्ड कर्मचारी लइका छोटे ले बड़े होथे , बड़े हो के अपन पाँव म खड़ा होथे | बड़े- बड़े सपना के संग गृहस्थ आश्रम...
🟪 रविवारीय साहित्यिक :छत्तीसगढ़ आसपास 3 years ago ▪️ सड़क की व्यथा - तारक नाथ चौधुरी •तारक नाथ चौधुरी सुनो पथिक! मैं ऐसी नहीं थी हमेशा जैसी अभी हूँ..... मैं तो थी निपट...
कविता आसपास : महेश राठौर ‘ मलय ‘ 3 years ago 🌸 बहुत छेड़ती है - महेश राठौर ' मलय ' { जांजगीर छत्तीसगढ़ } विदूषी नववधू-सी हो गई है प्रकृति. नित नूतन सृजन के लिए...
कविता आसपास : गणेश कछवाहा [रायगढ़ छत्तीसगढ़ ] 3 years ago 1. मैं चलूंगा हां अकेले ही चलूंगा ज़रूर चलूंगा।। पैरों पर छाले ही तो पड़ेंगे मुझे भूखे,नंगे पांव ही चलने दीजिए एक नया इतिहास रचने...
कविता आसपास : दिलशाद सैफी 3 years ago 🌸 सियासी रंग - दिलशाद सैफी [ रायपुर छत्तीसगढ़ ] मारो मारो और मारो बहा दो लहू इनका ये तो कमज़र्फ़ है,बेगैरत भी इन कमबख़्तो...
कविता आसपास : तारक नाथ चौधुरी 3 years ago 🌸 चलो इक बार फिर से... - तारक नाथ चौधुरी [ चरोदा भिलाई, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] चलो इक बार फिर विश्वास का दीपक...