कविता 6 years ago नारी बने कल्याणी -श्रीमती वंदना खरे, कोरबा-छत्तीसगढ़ नारी तो है गुणों की खान , आओ करते हम उसका बखान। दुर्गा, लक्ष्मी ,पार्वती सरस्वती के रूपों...
कविता 6 years ago आदमी -सदानंद टोकेकर, पुणे-मुंबई क्यूं इतना ख़ुदगर्ज हो गया है आदमी पहले तो था इंसान, इंसान हो गया आदमी बातों-बातों में खेल बन जाता है...
गीत 6 years ago प्यारी बेटियां -उज्ज्वल प्रसन्नो प्रेम के प्रकाश का जीवन के विकास का । अद्भुत अनुपम आधार बेटियाँ।। सृष्टि का आधार अनोखा दुख में संबल। सुख...
गज़ल 6 years ago बेहद सहमा सा है आदमी आजकल -डॉ. प्रभा शर्मा 'सागर' बेहद सहमा सा है आदमी आजकल कोरोना की जानलेवा घड़ी आजकल याद परदेश में घर...
कविता बोझ- आख़िर कौन ? – नीलम जायसवाल 6 years ago बचपन में सुना था- लड़कियाँ होती हैं बोझ माँ-बाप पर । उन्होंने मुझे पाला, पढ़ाया, और कर दिया मेरा कन्यादान, मैंने आभार माना। फिर... जीवन...
नव गीत हो असंगत रूप तो – डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 6 years ago हो असंगत रूप तो उसको गढ़ा जाता नहीं हर चमकती चीज़ को छूने बढ़ा जाता नहीं फल नहीं लगते जहाँ खिलती नहीं हैं टहनियाँ उन...
कविता – यशवन्त सिन्हा ‘कमल’ 6 years ago सामने नहीं आता अब कोई भीम जो करे रक्तपान दुशासन की छाती से चीर दे जांघ दुर्योधन की छेड़ दे युद्ध तुम्हारी अस्मिता की ख़ातिर...
बेटी -निधि सिन्हा 6 years ago क्यों कभी निर्भया तो कभी मनीषा होती हैं बलात्कार का शिकार क्यों हवस पर शिकंजा नहीं, क्यों दुःशासन पर होता नहीं प्रहार. क्यों दब जाती...
कविता, पिता – संतोष झांझी 6 years ago पिता आफिस की फाइलों में दबे फैक्टरी के शोर से थके डाँटते है पिता दोस्तों से गपियाते बेटे को वो देखकर आये हैं फाइल दबाये...
कविता – डॉ.सोनाली चक्रवर्ती 6 years ago जो लोग दंगे करवाते हैं जो लोग मॉब लीँचिंग करते हैं जो लोग बेटियों को कोख में ही मार देते हैं प्रकृति से लड़ लेते...