■छत्तीसगढ़ी कविता : अशोक पटेल ‘आशु’ [ शिवरीनारायण,छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ हरियर बनाबो ग चल धरती ल हरियर बनाबो ग चल धरती ल सुग्घर बनाबो ग चल धरती ल नांन्हे-नांन्हे बिरवा लगाबो जुर-मिल के सब...
■कविता आसपास : डॉ. मंजुला पांडे [नैनीताल-उत्तराखंड]● 4 years ago ♀ बारिश बारिश आती है जब जब भगा देती है मेरे मन के आंगन के सूनेपन को महसूस करती हूं अपने आप में एक खुशबू...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष ग़ज़ल : डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 4 years ago ♀ जब तक जल है जबतक भूमंडल में जल है तबतक जीवन में मंगल है तोड़ मिलेगा हर संकट का इसमें हर दुविधा का हल...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष बाल कविता : तारकनाथ चौधुरी. 4 years ago ♀ गोलू और दादाजी जब गोलू बोला- दादाजी इस बार हमें भी गाँव ले चलो। बूढे़ बरगद बाबा की तुम छाँव ले चलो।। देखेंगे हम...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : मीता अग्रवाल ‘मधुर’ 4 years ago ♀ पर्यावरण भूले हम पर्यावरण,नूतन नित्य विकास। वृक्षों को हम काटते,भौतिकता की आस। भौतिकता की आस,बची अब केवल सड़के। ऊँची हुई इमारतें,कार खानें हो बड़के...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : वीणा [झुमरीतिलैया, झारखंड]● 4 years ago ♀ प्रकृति प्रकृति की आबोहवा में पलती है एक जिंदगी सुनहरे भविष्य का सपना संजोये लोग उसे कुचल कर जीना चाहते हैं एक खूबसूरत लम्हा...
■पर्यावरण दिवस पर कल्याण सिंह साहू ‘लोक’ के प्रकॄति से सम्बंधित दो रचनाएं. 4 years ago ♀ पर्यावरण और प्रदूषण प्रदूषण के कारण पर्यावरण में विनाश मनुष्य कर रहे हैं अपना ही विनाश बम गोला बारूद से देश का विनाश एक...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष कविता : विद्या गुप्ता● 4 years ago ♀ हरी सांसों के लिए हरी सांसों के लिए हरे पत्ते में बह रही है एक नदी है हरहराती हुई हरे पत्ते में चमक रहा...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष एक छोटी कविता : उज्ज्वल प्रसन्नो● 4 years ago ♀ एक बूंद पानी के लिए एक पौधा बाट जोह रहा एक बूंद पानी के लिए । एक पौधा नहीं जानता क्या क्या करता है...
■पर्यावरण दिवस पर विशेष कविता : डॉ. आशा सिंह सिकरवार [ अहमदाबाद गुजरात ]● 4 years ago ♀ पेड़ पुकारते हैं जब रात में सो रहे होते हैं पेड़ धूप और चिड़िया के स्वप्न में डूबे होते हैं वे आरियाँ चलाते हैं...