poetry

■विश्व कविता दिवस पर विशेष : गीता विश्वकर्मा ‘नेह’ [कोरबा छत्तीसगढ़].

♀ कुंडलियाँ 1.  हे कविता रानी सखी, उर की हो आल्हाद। चित्त कल्पना शब्द में,लिखती मन का नाद ।। लिखती मन का नाद,लेखनी हर विचार...

■ 21 मार्च विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य पर- विजय पंडा [छत्तीसगढ़].

♀ तब कविता लिखता हूँ. __________________ अराजकता समाज में बोलने लगे कुकुरमुत्ते स्वर्णी पौधे को दबाने लगे पालनहार कृषक सिर पर हाथ दे बैठने लगे...

■ 20 मार्च गौरेया दिवस पर विशेष : मिथिलेश रॉय [शहडोल मध्यप्रदेश].

♀ गौरेया __________________ प्यारी, मेरी प्यारी गौरैया, झुंड की झुंड आती थी तुम कभी घर,आँगन में तुम्हारी चहचाहट से भरी होती सुबह,दुपहरी, सांझ, मां सूखने...
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