poetry

■मातृव दिवस के अवसर पर माँ को समर्पित परमेश्वर वैष्णव की दो कविताएं.

♀ माँ के हाथों से बनी रोटियां माँ आवश्यकतानुसार महीन चिकने आटे लेकर ममता जल उसमें उढ़ेलकर मथती गुथती गोल गोल लोई अपनी सुकोल हथेलियों...

■रचना आसपास : परमेश्वर वैष्णव.

♀ ऊपर उड़ने वाले गिरेंगे जमीं पर. ♀ परमेश्वर वैष्णव. [ अध्य्क्ष, प्रगतिशील लेखक संघ भिलाई-दुर्ग,छत्तीसगढ़ ] अंधेरे में थे आभास हुआ सहसा जब प्रकाश...

■कविता : अमृता मिश्रा ‘निधि’ [अध्यापिका दिल्ली पब्लिक स्कूल, भिलाई-छत्तीसगढ़].

जीवन में कुछ रिश्ते होते हैं और उन रिश्तों में होता है जीवन! उन रिश्तों के अस्तित्व में अर्थों को समेटे होते हैं, कई शब्द!...
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