■मातृव दिवस के अवसर पर माँ को समर्पित परमेश्वर वैष्णव की दो कविताएं. 4 years ago ♀ माँ के हाथों से बनी रोटियां माँ आवश्यकतानुसार महीन चिकने आटे लेकर ममता जल उसमें उढ़ेलकर मथती गुथती गोल गोल लोई अपनी सुकोल हथेलियों...
■रचना आसपास : परमेश्वर वैष्णव [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] 4 years ago ♀ नया दौर शब्दों ने मुंह ढाँक लिए वाक्य छिप रहे कटी नांक लिए तर्क हुए अपमानित कुतर्क हो रहे सम्मानित सार्थक अर्थ हुए अमान्य...
■कविता : विद्या गुप्ता [ दुर्ग छत्तीसगढ़] 4 years ago ♀ प्रेम की परिभाषा मैं प्रेम हूं बचा रहूंगा देह के बगैर देह के बाद भी तुम्हारे लिए बह रहा हूं सृष्टि की शिराओं में...
■रचना आसपास : परमेश्वर वैष्णव. 4 years ago ♀ ऊपर उड़ने वाले गिरेंगे जमीं पर. ♀ परमेश्वर वैष्णव. [ अध्य्क्ष, प्रगतिशील लेखक संघ भिलाई-दुर्ग,छत्तीसगढ़ ] अंधेरे में थे आभास हुआ सहसा जब प्रकाश...
■कविता : अमृता मिश्रा ‘निधि’ [अध्यापिका दिल्ली पब्लिक स्कूल, भिलाई-छत्तीसगढ़]. 4 years ago जीवन में कुछ रिश्ते होते हैं और उन रिश्तों में होता है जीवन! उन रिश्तों के अस्तित्व में अर्थों को समेटे होते हैं, कई शब्द!...
■विश्व पुस्तक दिवस के उपलक्ष में विद्या गुप्ता की एक रचना. 4 years ago ♀ रुकिए मत लिखते रहिए...!! ♀ विद्या गुप्ता [ दुर्ग छत्तीसगढ़ ] किसी दिन थक कर अवश्य लौटेगी पीढ़ी फिर किताबों की ओर....!! बांध नहीं...
■कविता : तेज़ नारायण राय [ दुमका झारखंड ] 4 years ago ♀ मैं इतना भी खुदगर्ज नहीं ♀ कवि संपर्क- ♀ 62075 86995 ◆◆◆ ◆◆◆ ◆◆◆
■कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी. 4 years ago ♀ हिन्दी ग़ज़ल _________ चुप्पी के पट खोल हृदय के भाव मुखरित हो गये। हम भी इस युग के नये रंगों से परिचित हो गये।।...
■कविता आसपास : उज्ज्वल पांडेय [धनबाद झारखंड]. 4 years ago ♀ ओह स्त्रियां पौराणिक कहानियों में जब कभी संतान प्राप्ति का यज्ञ हुआ पुत्रों के लिए हुआ.. भारतीय सभ्यता के सबसे बड़े नायक के जन्म...
■शहीद दिवस पर विशेष : गीता विश्वकर्मा ‘नेह’. 4 years ago ♀ वीर शहीदों को नमन ♀ गीता विश्वकर्मा 'नेह' [ कोरबा छत्तीसगढ़ ] भारत भू के वीर शहीदों,बारंबार प्रणाम हैं । अमर ज्योति जलकर कहती...