■75 भारत महोत्सव पर विशेष : ■डॉ. मीता अग्रवाल ‘मधुर’. 5 years ago ●देश भक्ति गीत. -डॉ. मीता अग्रवाल 'मधुर'. [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] ♀है भारत के लाल खड़े। रक्षक बनके नित्य अड़े। भक्षक मार गिराएगे, दमन करे रिपु...
■75 भारत महोत्सव पर विशेष : ■महेश राजा. 5 years ago ●दो लघुकथाएं. -महेश राजा. [ महासमुंद-छत्तीसगढ़ ] ■तिरंगा. तिरंगा ले लो दादा जी।दो और तीन रुपये में। वे चौंके पलट कर देखा,एक आठ वर्षीय बालक...
■75 भारत महोत्सव पर विशेष : ■कमल सिंह. 5 years ago ●आज़ादी के परवाने. -कमल सिंह. [ अलवर-राजस्थान ] जलते - तपते शोलो ने आजाद फ़िज़ा का बिगुल बजाया था । आजादी की जद में आकर...
■75 भारत अमृत महोत्सव पर विशेष : ■रितु शर्मा. 5 years ago ●है जश्न आज़ादी का. -रितु शर्मा. [ रोहिणी पुरम-दिल्ली ] यूँ ही नहीं आजादी का जश्न मना लेते हैं दी गयीं थीं जाने कितनी कुर्बानियां...
■75 भारत अमृत महोत्सव पर विशेष : ■तारकनाथ चौधुरी. 5 years ago ●हिन्दुस्तां हमारा. -तारकनाथ चौधुरी. [ चरोदा-भिलाई, छत्तीसगढ़ ] निज विकृतियों से जूझ रहा है, हिंदुस्ताँ हमारा, सारे जहाँँ से अच्छा हिंदुस्ताँ हमारा.. इंद्रधनुषी संस्कृति को...
■75 भारत अमृत महोत्सव पर विशेष : ■आलोक शर्मा. 5 years ago ●देश के लिए जीना है. -आलोक शर्मा. [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] देश की वर्तमान दशा पर हमने एक लंबी कविता पढ़ी लोगों ने जिसे कानों से...
■कविता आसपास : ■गोविन्द पाल 5 years ago ●कद और पद -गोविन्द पाल [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] हम तुम्हें साथ चलने को कहा तुम बहाना बनाते रहे नखरे दिखाते रहे, मिलकर इतिहास रचने को...
■कविता आसपास : [ प्रख्यात बंगला कवि पल्लव चटर्जी की कविता ‘आमी को थाओ जाबो ना’ का भावानुवाद ‘मैं कहीं नहीं जाऊंगा’ का हिंदी में अनुवाद कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया है. पाठकों के लिए पहली बार अनुवाद कविता प्रेषित है. ] 5 years ago ●मैं कहीं नहीं जाऊँगा -मूल कवि पल्लव चटर्जी -अनुवाद तारकनाथ चौधुरी ●अनुवादक कवि संपर्क- ●83494 08210 ■■■ ■■■
■कविता आसपास : ■डॉ. शिवसेन जैन ‘संघर्ष’. 5 years ago ●विसंगति -डॉ. शिवसेन जैन 'संघर्ष' [ शहडोल-मध्यप्रदेश ] किसी चिकित्सालय में दवा है तो चिकित्सक नहीं है किसी चिकित्सालय में चिकित्सक है / तो दवा...
■कविता आसपास : ■अनंत थवाईत. 5 years ago ●मैं चौराहे का आदमी -अनंत थवाईत [ चाम्पा-छत्तीसगढ़ ] कभी बारात कभी शव यात्रा कभी रैली कभी धरना प्रदर्शन कभी धार्मिक शोभायात्रा कभी मनचलों की...