■बाल ग़ज़ल : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ●घबराना मत -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] संकट से घबराना मत सच से आँख चुराना मत नेकी के पथ पर चलना राह ग़लत...
■कविता आसपास : •जितेन्द्र ‘कबीर’. 5 years ago ●एक सीमा जरूरी है -जितेन्द्र 'कबीर' [ चम्बा-हिमाचल प्रदेश ] रिश्तों में अनुचित मांग पर एक बार जब हम झुक जाते हैं, तो आने वाले...
■कविता आसपास : •राम कुमार चंद्रवंशी. 5 years ago ●एक बाग के फूल सभी हम -राम कुमार चंद्रवंशी [ राजनांदगांव-छत्तीसगढ़ ] यह दुनिया है एक बगीचा, नहीं उच्च अरु कोई नीचा, एक बाग के...
■कविता आसपास : •सरिता गुप्ता ‘आरजू’. 5 years ago ●प्रकृति -सरिता गुप्ता 'आरजू' [ रायगढ़-छत्तीसगढ़ ] काल के कपाल पर, सृष्टि के श्रृंगार पर सुरमयी पराग -कण सुगंध को बिखेरती है॥ प्रेम के महारास...
■कविता आसपास : •दिलशाद सैफ़ी. 5 years ago ●बचपन -दिलशाद सैफ़ी [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] बचपन इस जीवन के आरंभ काल का सबसे सुंदर अविस्मरणीय क्षण होता है... काश के हम न कभी बड़े...
■छत्तीसगढ़ी रचना : •दुर्गा प्रसाद पारकर. 5 years ago ●रेडीमेट डॉक्टर. -दुर्गा प्रसाद पारकर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] फेंकूराम के टोटा म मछरी के काँटा ह अरहज गे , ए काँटा ह मोर संग नइ...
■छत्तीसगढ़ी रचना : •डॉ. बलदाऊ राम साहू. 5 years ago ●बैरी ला पतियाना हे. -डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ] इक दिन इहाँ छोड़ के सब ला जाना हे ये बात ह जी नो...
■ग़ज़ल : ●डीपी लहरे ‘मौज़’. 5 years ago ●कभी थे मौज़ हम सजदा-रवां उनके हुज़ूर आख़िर. ●ख़ुदा की शक़्ल में निकले जो पत्थर याद आते हैं. -डीपी लहरे 'मौज़' [ कवर्धा-छत्तीसगढ़ ] जो...
■कुण्डलिया : •आशा आज़ाद ‘कृति’. 5 years ago ●बाल श्रम ला रोकव -आशा आज़ाद 'कृति' [ मानिकपुर, कोरबा-छत्तीसगढ़ ] रोकव मिलके बाल श्रम, समझव मनुज सुजान । लइका मन के काज ले, बाधित...
■तोटक छंद : •राम कुमार चंद्रवंशी. 5 years ago ●जब भोर हुआ. -राम कुमार चंद्रवंशी. [ छुरिया,राजनांदगांव-छत्तीसगढ़ ] जब भोर हुआ चिड़िया चहके। तब फूल खिले बगिया महके। तितली अलि मस्त परागन में। बिखरी...