इस माह की कवयित्री : •पूनम पाठक. 5 years ago -पूनम पाठक 【 इस्लामनगर, बदायूं,उत्तरप्रदेश ] ●जाग मुसाफिर जाग मुसाफिर = हे जाग मुसाफिर यह मानवता तेरे हाथ में यह दुनिया तेरे हाथ में यह...
डॉ. बलदाऊ राम साहू की दो रचना. 5 years ago ●जब बादर .. जब बादर छाथे जी आसमान मा जब-जब बादर छाथे जी मोर नाचथे, मेंचका ह नरियाथे जी। सुरुर - सुरुर चलथे पुरवाही उत्ती...
रचना आसपास : •दुर्गा प्रसाद पारकर. 5 years ago ●टोपी -दुर्गा प्रसाद पारकर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] मोर नाम टोपी हे मँय खादी के बनथँव मोर असली रंग सादा हे इही सब ले जादा हे...
■रचना आसपास : •प्रिया देवांगन ‘प्रियू’. 5 years ago ●पलायन -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया, कबीरधाम-छत्तीसगढ़ ] छन्न पकैया छन्न पकैया, पैदल चलते जाते। बोझ उठाते सिर पर सारे, फिर भी हैं मुस्काते।। छन्न...
■ कविता आसपास : •सरिता गुप्ता ‘आरजू’. 5 years ago ●सूखे पत्ते -सरिता गुप्ता 'आरजू' [ घरघोड़ा, रायगढ़-छत्तीसगढ़ ] पतझड़ के सूखे वृक्षों में कभी हरीतिमा भी छाई थी। फूलों कलियों संग तितलियाँ इन पेड़ों...
■आज़ पर्यावरण दिवस पर विशेष : •वंदना गोपाल शर्मा ‘शैली’. 5 years ago ●न जाने कहाँ खो गया ? ●पीपल का वह पेड़.... -श्रीमती वंदना गोपाल शर्मा 'शैली'. [ भाटापारा-छत्तीसगढ़ ] चारों ओर से घिरी इमारतें., हवा से...
■आज़ पर्यावरण दिवस पर विशेष : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’. 5 years ago ●ग़ज़ल : वन में जीवन होता है -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] वन में जीवन होता है फिर क्यों काँटे बोता है मार...
■रचना आसपास : •डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 5 years ago ●हिन्दकी - मुझे लुभा न पाएगा -डॉ. माणिक विश्वकर्मा 'नवरंग' [ कोरबा-छत्तीसगढ़ ] मुझे लुभा न पाएगा मोहपाश तुम्हारा कभी नहीं बन पाऊंगा मैं ख़ास...
■रचना आसपास : •विजय पंडा 5 years ago ●बहती तटिनी -विजय पंडा [ घरघोड़ा, रायगढ़-छत्तीसगढ़ ] पुरातन समय के यादों स्मृति को लिए बहती तटिनी चलती निर्झरिणी अबाध , मीठे जलों से सिंचित...
कविता आसपास : •डॉ. रमा रानी ठाकुर 5 years ago [ ●आयुर्वेद की डॉक्टर रमा रानी ठाकुर,भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त होकर रचनात्मक लेखन में सक्रिय हैं. ●'छत्तीसगढ़ आसपास' नवोदित रचनाकारों को हमेशा लिखने के...