poetry

■विषय-विशेष पर रचना : •पूनम पाठक बदायूं.

●स्मृतियां शेष तुम्हारी -पूनम पाठक बदायूं [ इस्लामनगर,बदायूं-उत्तरप्रदेश ] बस स्मृतियाँ रह गयीं शेष तुम चले गए कौन से देश उंगली पकड़ चलाया होगा प्यार...

आज़ पिता दिवस के उपलक्ष्य पर डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, अपने पिता स्व.रामप्रसाद विश्वकर्मा को समर्पित 9 दोहे.

●स्व.रामप्रसाद विश्वकर्मा. ● समझो उसको मिल गया ,जीवन का आधार जिसकी क़िस्मत में रहा , रोज़ पिता का प्यार ● गूँजे ख़ुशियों से सदा, घर...

■कविता आसपास : •दिलशाद सैफ़ी.

●बचपन -दिलशाद सैफ़ी [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] बचपन इस जीवन के आरंभ काल का सबसे सुंदर अविस्मरणीय क्षण होता है... काश के हम न कभी बड़े...
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