■कविता आसपास ●मीता अग्रवाल ‘मधुर’. 5 years ago ●नवगीत -मीता अग्रवाल 'मधुर' [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] नित पसारे पाँव बैरी मौन घाती पर खदेड़े ज्वार भाटा सिंधु तट पर राहु ग्रसता जग लतेड़े। व्याधियों...
कविता आसपास- संतोष झांझी 5 years ago ●हिरनी के पांव थम गये [ 30 वर्ष पुरानी,छंद मुक्त पहली कविता ] एकदिन माँ की गोद से किलक कर उछली घुटनों के बल जमीन...
कविता आसपास- दिलशाद सैफी 5 years ago ●जंगल -दिलशाद सैफी [ रायपुर-छत्तीसगढ़ ] खामोशीयों में सिसकते हुए चिखते है कहने को है बेताब, ये धधकते हुए जंगल जलते है जब वो तड़प...
■कविता आसपास – •झरना मुख़र्जी 5 years ago ●बस मुट्ठी भर बताशा. -झरना मुखर्जी अंतर्मन में दबी हुई एक चीख सुनाई देती है फरियादों के खिड़की से सुन बस मौन सुनाई देती है...
श्रद्धांजलि : ●कवि मुकुंद कौशल. 5 years ago •कवि हार गया -डॉ. बलदाऊ राम साहू कवि जंग जीतने के लिए लिखता है कविता उसकी लेखनी में आस और विश्वास के होते हैं भाव...
कविता आसपास : •विजय पंडा 5 years ago ●वीर पुत्रों को नमन -विजय पंडा [ घरगोड़ा, रायगढ़, छत्तीसगढ़] मन मेरा क्षुब्ध है ! वह कायर, मन मष्तिष्क से विक्षिप्त हैं हमारे अपने रक्षकों...
■कविता आसपास : •प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ 5 years ago ●पापा की गुड़िया -प्रिया देवांगन 'प्रियू' [ पंडरिया, जिला-कबीरधाम, छत्तीसगढ़ ] मैं पापा की गुड़िया रानी, मेरे अच्छे साथी थे। खेल खेल में हम दोनों...
बाल मुक्तक- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ 5 years ago ●ख़ूब ठहाके लगाती है 1. नटखट है पर भोली है मिश्री जैसी बोली है डूबी है वह रंगों में दिनभर खेली ,होली है 2. घर...
रचना आसपास- सरस्वती धानेश्वर ‘सारा’ 5 years ago ●चलो एक नई मुहिम चलाएं हम -सरस्वती धानेश्वर 'सारा' [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] एक फकीर ने कहा था कि, इंसानियत माफ कर देती है,सब गुनाहों को,आज...
होली पर विशेष- तारकनाथ चौधुरी 5 years ago ●ढोल-नगाड़े नहीं बजेंगे, ●अबकी बार होली में. -तारकनाथ चौधुरी [ चरोदा,भिलाई, छत्तीसगढ़ ] ढोल-नगाडे़ नहीं बजेंगे, अबकी बार होली में, रंग-फव्वारे नहीं उडे़ंगे, अबकी बार...