5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘ 3 years ago •विरासत मरुस्थल में अकेला मानव जिसके चारो तरफ शवों का अम्बार लगा था कुल्हाड़ी से अपने ही सिर पर वार कर रहा था /पापी हूं,...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : प्रकाश चंद्र मण्डल 3 years ago •पौधे और बच्चे मैं ने--- बरसात के दिनों में बोया था एक छोटा सा पौधा न जाने कब वह पौधा पेड़ बन गया बहुत से...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : डॉ. नीलकंठ देवांगन 3 years ago •पेड़ लगावव दू चार पानी पवन दुनों जिनगी के सार जी के अधार ये गा संगी मन मं करव विचार मानो कहना हमार पेड़ लगावव...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : शुचि ‘ भवि ‘ 3 years ago •विश्व पर्यावरण दिवस सुनो चीत्कार तुम भी तो सुनो मैंने सुनी है वृक्ष की है अश्क,ज़ख़्म,फ़ुगां सब देखे आज मैंने उसके तुम भी तो देखो,,...
अंतरराष्ट्रीय साइकिल दिवस पर दो बाल कविता – बलदाऊ राम साहू 3 years ago •मेरी साइकिल मेरी साइकिल बड़ी निराली, रंग - बिरंगी, नीली - काली। चलती है वह सरपट, सर-सर, मैं दौड़ाऊँ इसे सड़क पर। इससे मेरी मीत...
कविता आसपास : डॉ. अंजना श्रीवास्तव [भिलाई, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 मौत का खाका चौबीस घंटे भी अब बहुत बड़े लगने लगे हैं । समय अब काटे नही कट रहा है । क्या करें ?...
कविता आसपास : रंजना द्विवेदी { रायपुर छत्तीसगढ़ } 3 years ago 🌸 मेरा तुम्हें इतना समझना क्या काफी न था.... मेरा तुम्हे इतना समझना क्या काफी न था और क्या समझना बाकी था मुझे लगा हम...
साहित्य आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव [भिलाई छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 अचार मौसम आया आम का अचार बनाने की जुगत में लग गई हूं स्वयं के हाथ के अचार में मां के जैसे बनाये अचार...
कविता आसपास : रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 आईना एक दिन आईने के सामने गई सोचा थोड़ा संवार लूं खुद को बहुत अरसा हुआ थोड़ा निहार लूं खुद को जानती थी आईना...
कविता आसपास : संध्या श्रीवास्तव [भिलाई – दुर्ग, छत्तीसगढ़] 3 years ago 🌸 मैं इक बेजुबाँ फूल मैं इक बेजुबां फूल.... बागों में खिल कर भी तुम्हारे दिल की हर बात समझ जाता हूं मैं नैतिक बंधन...