अंतरराष्ट्रीय साइकिल दिवस पर दो बाल कविता – बलदाऊ राम साहू
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•मेरी साइकिल
मेरी साइकिल बड़ी निराली,
रंग – बिरंगी, नीली – काली।
चलती है वह सरपट, सर-सर,
मैं दौड़ाऊँ इसे सड़क पर।
इससे मेरी मीत पुरानी
लगती है जानी पहचानी।
मुझको शाला ले जाएगी,
और समय पर पहुँचाएगी।
काँटों से है इसे बचाता,
यह मुझको, मैं इसे घुमाता।
•साइकिल आई
नई-नई जब साइकिल आई
चढ़कर बब्बू ने दौड़ाई।
सरपट-सरपट साइकिल दौड़ी
जहाँ सड़क थी, चौड़ी-चौड़ी।
वाणी साइकिल लेकर आई
उसने भी सरपट दौड़ाई।
चुन्नू, मुन्नू , भोलू आए
मन भर साइकिल सभी चलाए।

•बलदाऊ राम साहू
•संपर्क –
•94076 50458
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chhattisgarhaaspaas
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