कविता आसपास : डॉ. नीलकंठ देवांगन 3 years ago 🌸 तेरा बसंत - मेरा दृष्टिकोण मधु चुम्बन पाके भंवरों का सिहर जाती हैं ज्यों कलियां यौवन के दहलीज पर पहुंच पुलकित होती जीवन गलियां...
कविता आसपास : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [आंध्रप्रदेश] 4 years ago ▪️ अश्विनी कुमार तुम खिलखिलाना चाहते हो बच्चों की तरह चहकना चाहते हो चिड़ियों की तरह उड़ना चाहते हो परियों की तरह बस तुम्हें विस्मृतियों...
🌸 कविता आसपास : डॉ. नीलकंठ देवांगन 4 years ago 🌸 नव वर्ष अभिनंदन - डॉ. नीलकंठ देवांगन [ शिवधाम कोडिया, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ ] दुग्ध फेन सा स्वच्छ दिवस का आगमन है पुनीत...
💞 कविता आसपास : रंजना द्विवेदी [रायपुर छत्तीसगढ़] 4 years ago 💞 प्रेम प्रेम उत्साह होता हैं दिल की सर्जनशीलता हैं, प्रेम मार्गदर्शक हैं, यही मुनष्य का स्वाभाविक भाव होता हैं प्रेम आशावादी बनाता हैं, जीवन...
🌸 कविता आसपास : रंजना द्विवेदी [ रायपुर छत्तीसगढ़ ] 4 years ago 🌸 मन की आवाज आज मुझसे ही मेरी मुलाकात हो गई कई सवाल लिए मैं खुद से ही दो चार हो गई मन ने कहा...
🌸 बचपन आसपास : डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग – छत्तीसगढ़ ] 4 years ago उल्लू जी रहते हैं शिमला-कुल्लू जी अब लगे ठिठुरने उल्लू जी। स्वेटर, शाल और मफलर टोपी पहने हैं वे सर पर। रहते हैं वे जिस...
🌸 कविता आसपास : डॉ. शिवसेन जैन ‘ संघर्ष ‘ [शहडोल – मध्यप्रदेश] 4 years ago ▪️ गीत कितना मुश्किल होता है,सन्नाटे को पी जाना । तार तार होते वस्त्रों को ,सी जाना । मौसम को होने देती सर्द नहीं जेठ...
🌸 कविता आसपास : दिलशाद सैफी [रायपुर – छत्तीसगढ़] 4 years ago ▪️ इंतज़ार बेजान पड़े पत्थरों को भी रहता है किसी न किसी का इंतजार किंतु जब पत्थरों को तराश के संँवार दिया जाता है और...
🌸 कविता आसपास : सुनीता अग्रवाल [रांची – झारखंड] 4 years ago ▪️ जाड़े के जायके जाड़े का मौसम आया सब के मन को अति भाया। गरमागरम चाय पकोड़े भी ख़ूब सर्दी में भाते। बाजरे की खिचड़ी...
🌸 रचना आसपास : डॉ. शेषपाल सिंह ‘ शेष ‘ [आगरा] 4 years ago 🌸 गीतिका आज के वातावरण की,बात बोलो क्या कहूँ? आदमी के आचरण की,बात बोलो क्या कहूँ? कहकहों की भीड़ में जब, बेखबर हम खो गये,...