poetry

होली विशेष : डॉ. दीक्षा चौबे

🌸 होली गीत - डॉ. दीक्षा चौबे [ दुर्ग छत्तीसगढ़ ] मस्ती में निकले हुरियारे , सजकर आए टोली में । एक-दूजे को रंग डालें...

कविता आसपास : अनुवादित रचना : पल्लव चटर्जी

•गणतंत्र की मंत्रणा •कवि : पल्लव चटर्जी •अनुवाद : तारकनाथ चौधुरी [बांग्ला से हिंदी में अनुवाद] पारदर्शी काँच से घिरा रेस्तराँ करीने से सजे डाइनिंग...

कवि और कविता : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

🌸 नशा मुक्ति के इश्तहार निकले... करार जिन्हें,संगी समझ बैठा था। वो तो बस, दरिया की धार निकले।। रफ़्ता-रफ्ता, दिलों को रौंदते हुए। सुकून के...
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