कविता : तारकनाथ चौधुरी
1 year ago
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संग दोष
– तारकनाथ चौधुरी
[ चरोदा-भिलाई, जिला-दुर्ग, छत्तीसगढ़ ]

रात भर जागकर
बारी-बारी से
सातों घरों की पहरेदारी करने वाले
कालू की आर्तनाद सुनकर
दौड़ता हुआ
दरधाजे़ के बाहर आया
मुझे देखकर कालू
मेरे पाँव पर लोटता
कूँ कूँ करने लगा।
इससे पहले कि मैं
उसकी करुण भाषा समझता
पडो़सी की भद्दी गालियाँ
मेरे कानों से टकराईं…
अंतिम वाक्य था-
“बेईमान हो गये हैं स्साले!
हमारा ही खाते हैं और
नुकसान भी हमारा करते हैं।
मेरे नये जूते का सत्यानाश कर दिया
हरामखोर ने…..!”
मैंने मन ही मन पडो़सी से कहा-
“हमलोगों के सान्निध्य में रहकर
वो भला और क्या सीखता?”
• संपर्क-
• 83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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