poetry

कविता, प्रियतम- भूषण चिपड़े

प्रियतम प्रियतम प्रियतम कहते कहते, प्रेमी मन मुस्काता है देख तुम्हारी सूरत को फिर, खाली मन भर जाता है सागर जैसी गहरी गहरी, आखों में...

ग़ज़ल -सुमन ओमानिया, नई दिल्ली

जिनसे थी अनजान सदा मैं रही ढूंढती पहचान सदा मैं जिससे थी अन्जान सदा मैं रही ढूढ़ती पहचान सदा मैं.... रोज चुराई आँखे उनसे अब...

गीत -सरोज तोमर

गरल पचाकर हमने साथी, इस जीवन को अमर बनाया। मरुथल की वीरानी सहकर, हरियाली का अंकुर पाया । रक्छा गुल बगिया की होगी, नागफणी के...

गीत

तेरे कारन -किशोर कुमार तिवारी छत्तीसगढ़ सुधियों का भंडार भरा है तेरे कारन । अधरों से श्रृंगार झरा है तेरे कारन ।। हृदय की बगिया...

ख़ाली कविता -आलोक शर्मा

वह अंतर्मुखी था भरे दिलवाला मगर आंखों में खालीपन था सब बोल- बोलकर दुनिया कमा रहे थे बोलते समय वह शब्द को सजाता नहीं था...
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