poetry

ग़ज़ल

जानें किस चीज़ की कमी है अभी, इन आँखों में क्यों नमी है अभी. -संतोष झांझी जानें किस चीज़ की कमी है अभी इन आँखों...

दिल दिया मैंने तुझे अब प्यार कर, आज मेरे हमसफ़र इक़रार कर

ग़ज़ल -अनन्या श्री कानपुर-उत्तरप्रदेश   दिल दिया मैंने तुझे अब प्यार कर। आज मेरे हमसफ़र इक़रार कर। रात बीतेगी सहर भी आएगी। इश्क़ का दरिया...

कविता, प्रियतम- भूषण चिपड़े

प्रियतम प्रियतम प्रियतम कहते कहते, प्रेमी मन मुस्काता है देख तुम्हारी सूरत को फिर, खाली मन भर जाता है सागर जैसी गहरी गहरी, आखों में...

ग़ज़ल -सुमन ओमानिया, नई दिल्ली

जिनसे थी अनजान सदा मैं रही ढूंढती पहचान सदा मैं जिससे थी अन्जान सदा मैं रही ढूढ़ती पहचान सदा मैं.... रोज चुराई आँखे उनसे अब...
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