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कविता- अभिव्यक्ति पाण्डेय

आज जहाँ बस सूखी धरती जल को तरसा करती है माँ कहती है कभी यहाँ, कश्ती तैरा करती थी हरे भरे जो जंगल गम हैं,बड़ी...

कविता – मां

डॉ. बीना सिंह मां तेरा साथ है तो .....................सुखद कहानी है मां तेरा साथ है तो .....................जीवन में रवानी है मां तेरा स्पर्श कराता .........................याद...

कविता : ” तलाशती निगाहें “

कवि - त्र्यम्बक राव साटकर "अम्बर" जरा सा झाँक लीजिए, कोविड में गिरफ्त, उस अपने को, जो आपका अपना है । दूर से,दूरभाष से ही...

कविता

कुछ मुट्ठी पर लड़कियां -सीता चौहान 'पवन',ग्वालियर   कुछ मुट्ठी भर लड़किया कुछ मुट्ठी भर लड़कियां हमेशा नही ढोती निराशाओं को अपने कंधो पर वह...

नवगीत -अक्षरा हूँ

वार भीतर तक करूँगा अक्षरा हूँ तुम अकारण ही झलकते जा रहे हो अपने ख़ालीपन पर इतरा रहे हो शांत रहता हूँ हमेशा मैं भरा...

आज़ादी का अर्थ – पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे

देशभक्तों की कुर्बानी, क्यों होती है व्यर्थ, 73 सालों में,समझ न पाये, आज़ादी का अर्थ० भर्ष्टाचार का,बढ़ता ग्राफ, इसको कहते आज़ादी, निर्धन होते,रोज़ साफ़, इसको...
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