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ग़ज़ल, रिश्ते नाते बहुमंजिले हैं सावधान! सब रेत के टीले हैं- परमेश्वर वैष्णव, भिलाई-छत्तीसगढ़

रिश्ते नाते बहु मंजिलें हैं सावधान ! सब रेत के टीले हैं स्वार्थ, गुमान के तूफान में कई बिछुड़े और कई मिले हैं हरा भरा...

ग़ज़ल -शुचि ‘भवि’, भिलाई-छत्तीसगढ़

है इश्क़ फ़क़त तुमसे,फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने नहीं आते है इश्क़ फ़कत तुमसे, फ़साने नहीं आते सच बोलते हैं हमको बहाने...

ग़ज़ल, मैं समझी थी अक्सर वो आया करेंगे, पता था नहीं दिल दुखाया करेंगे- झरना मुख़र्जी, वाराणसी-उत्तरप्रदेश

मैं समझी थी अक्सर वो आया करेंगे पता था नहीं दिल दुखा़या करेंगे। भले दूर कर दो निगाहों से अपने मगर हम तो दर पर...
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