बसंत पंचमी पर विशेष : डॉ. नीलकंठ देवांगन 2 years ago 🟥 बसंत तेरा आना सार्थक नहीं क्योंकि प्रिया साथ नहीं.... - डॉ. नीलकंठ देवांगन [ दुर्ग छत्तीसगढ़ ] ऋतुराज बसंत तू क्यों आया उत्कंठ भाव...
कविता आसपास : डॉ. रंजना द्विवेदी 2 years ago 🟥 मैं कविता लिखती हूं. - डॉ. रंजना द्विवेदी [ रायपुर छत्तीसगढ़ ] मैं कविता लिखती हूं अलंकार,छंद, दोहों से परे बस भाव उकेरा करती...
कविता आसपास : प्रवेश शर्मा 2 years ago 🟥 नाम ले राम का - प्रवेश शर्मा [ चंदौसी, संभल ] नाम ले राम का = राम पधारे हैँ अयोध्या में सारा जग जगमग...
बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर [ भिलाई-छत्तीसगढ़ ] 2 years ago 🟥 फरा कनकी पिसान म नून डार के कस के सान ले पानी डार के दुनो हाथ म तैं ओला बर ले बर बर के...
बाल कविता : कमलेश प्रसाद शर्माबाबू [कटंगी-गंडई, जिला- केसीजी, छत्तीसगढ़] 2 years ago 🟥 साबुन सुघ्घर-सुघ्घर प्यारा साबुन। सबके हवय दुलारा साबुन।। बढ़िया काम आथे साबुन। साफ सफाई बनाथे साबुन।। रंग-बिरंग के आथे साबुन। खुशबू दे ममहाथे साबुन।...
बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर 2 years ago 🟥 ढेखरा बारी बखरी म कोहड़ा सेमी लगा ले नार के चढ़े बर बने ढेखरा गड़िया ले ढेकरा के परसादे नार ह उपर चढ़थे दिन...
कहानी : उर्मिला शुक्ल 2 years ago 🟥 अम्मा की डोली - उर्मिला शुक्ल [ रायपुर छत्तीसगढ़] डोली सजानी है मुझे | अम्मा की डोली| उन्हें विदा करना है | कैसे कर...
कविता : पूनम पाठक बदायूं 2 years ago 🟥 आदिवासियों को विकसित बनाएं - पूनम पाठक बदायूं [ इस्लामनगर उत्तरप्रदेश ] आदिवासियों को विकसित बनाएं = आदिवासी जंगल के हैं संरक्षक कब तक...
बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर 2 years ago 🟥 हमर गवंई गाँव सरग ले सुग्घर हमर गवँई गाँव जिहां आमा अमली के जुड़ छांव गाँव वाले मन करथे मन भर खेती खेती ला...
विशेष अवसर विशेष कविता : अरुण कुमार निगम 2 years ago 🟥 वासंती फरवरी - अरुण कुमार निगम [ दुर्ग छत्तीसगढ़ ] कम-उम्र बदन से छरहरी लाई वसंत फिर फरवरी। शायर कवियों का दिल लेकर शब्दों...