poetry

कविता आसपास : ‘ धूप गुन गुनाने लगी ‘ – डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

धूप गुनगुनाने लगी 💓 नवोढ़ा धूप अब गुनगुनाने लगी यामिनी लिहाफ में जाने लगी चांदनी से दर्द सम्हाला न गया सूनी रात में आंसू बहाने...

कविता : ‘ स्वयं सिध्दा ‘ -डॉ.मीता अग्रवाल ‘ मधुर ‘ [रायपुर छत्तीसगढ़]

💓 स्वयं सिध्दा घर-बाहर ज्ञान-विज्ञान कला कौशल अंतरिक्ष सभी हदों को केवल जाना ही नहीं आरोह अवरोह मध्य जूझती विजय-तिलक की हकदार शक्ति की साधक...
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