कविता आसपास : नरेंद्र देवांगन ‘ देव ‘ {मिनाक्षी नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़} 3 years ago ▪️ परिवर्तन प्रकृति की प्यास यूँ ही नहीं आते पतझड़ों के मौसम, लेके आती है अपने संग, कुटिल मुस्कानों वाली जलन की चुभन, यूं ही...
कविता आसपास : उज्ज्वल पांडेय [धनबाद झारखंड] 3 years ago •शातिर कॉरपोरेट वे आए और पत्थर काट कर ले गए हमारे झारखंड से कोयला ले गए अभ्रक ले गए बॉक्साइट ले गए ग्रेफाईट ले गए...
रचना आसपास : तारक नाथ चौधुरी [चरोदा, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़] 3 years ago { बालासोर रेल दुर्घटना का हृदय विदारक दृश्य और असम्पूर्ण प्रेम की लिखित गवाही देती रक्त रंजित डायरियां देख संवेदनाओं के ज्वार में जो कुछ...
कविता आसपास ; महेश राठौर ‘ मलय ‘ [जांजगीर, छत्तीसगढ़] 3 years ago •चिनारों को आसमान से आँख मिलाते घनी हरियाली को अपनी बाँहों में समेटे ऊँचे और विशाल तनों के साथ धरती पर मजबूती के साथ खड़े...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : बलदाऊ राम साहू 3 years ago •जीवन में खुशियाँ हम लाएं आओ घर-घर अलख जगाएँ सुंदर पर्यावरण बनाएँ। काट रहे हैं जो वृक्षों को उनको जाकर हम समझाएँ। व्यर्थ बहाए पानी...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : दिलशाद सैफी 3 years ago •हाँ मैं हूँ पेड़ हाँ मैं पेड़ हूँ....! विशाल बाहे फैलाये हुए करती स्वागत तुम्हारा मुस्कुरा कर.....,, देती जीवन दान तुम्हें, प्राण वायु बन मेरी...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष : डॉ. बीना सिंह ‘ रागी ‘ 3 years ago •पर्यावरण बचाओ आधुनिकता की यह कैसी रफ्तार है खड़ा है मानव जैसे मौत की कतार है जंगल वन पेड़ पौधे काटने छांटने की होड़ लगी...
5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : एन एल मौर्य ‘ प्रीतम ‘ 3 years ago •विरासत मरुस्थल में अकेला मानव जिसके चारो तरफ शवों का अम्बार लगा था कुल्हाड़ी से अपने ही सिर पर वार कर रहा था /पापी हूं,...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : प्रकाश चंद्र मण्डल 3 years ago •पौधे और बच्चे मैं ने--- बरसात के दिनों में बोया था एक छोटा सा पौधा न जाने कब वह पौधा पेड़ बन गया बहुत से...
5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : डॉ. नीलकंठ देवांगन 3 years ago •पेड़ लगावव दू चार पानी पवन दुनों जिनगी के सार जी के अधार ये गा संगी मन मं करव विचार मानो कहना हमार पेड़ लगावव...