संस्मरण : ‘धरा का श्रृंगार उल्टा पानी’ – दीप्ति श्रीवास्तव 5 months ago ▪️ छत्तीसगढ़ का शिमला 'मैनपाट' - दीप्ति श्रीवास्तव [ छत्तीसगढ़ भिलाई ] धरा अपने वस्त्र की तासीर हर जगह अलग अलग रखती है। कहीं खनिज...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘ आरंभ’ – अमृता मिश्रा 5 months ago ▪️ एक कदम - अमृता मिश्रा [ दिल्ली पब्लिक स्कूल, भिलाई, छत्तीसगढ़] एक क़दम इतना-सा ही तो फ़ासला है खड़े रहने और चल पड़ने के...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – पं. अंजू पाण्डेय ‘अश्रु’ 5 months ago ▪️ बृज की बात बृज की बात ये बृज के ग्वाल बाल बृज की हर नार पे प्रीत लुटावत् है बार बार बृषभानुजा करे मनुहार...
अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा 5 months ago अब मैं क्या करूँ, अब मैं क्या करूँ, लाडो को तो जाना ही था क्योंकि वह मेरी नहीं थी, वह किसी की अमानत थी। ख़ून...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल 5 months ago ▪️ किस बात का अहंकार - प्रकाशचंद्र मण्डल [ छत्तीसगढ़-भिलाई ] मिट्टी के ढेले में तैयार तुम इंसान के रूप में हो परिचय पर तुम्हें...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी 5 months ago ▪️ • सीढ़ी समी चाहते हैं सीढी़ सभी चाहते हैं ऊपर चढ़ना इसीलिए आदिम युग से अब तक सीढी़ की उपयोगिता पर अनुसंधान जारी है...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा 5 months ago ▪️ • नयन नयन की सुंदरता नयन से नयनों का सुख नयन को , मिलन नयन का हो नयन से बिन शब्दों के करते बातें...
यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता 5 months ago ▪️ मेरी पहली यात्रा - विद्या गुप्ता { छत्तीसगढ़-दुर्ग } स्मृतियां वास्तव में एक यात्रा है। जब हम स्मृतियों की लचीली भूमि पर अंकित जीवन...
कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग] 6 months ago ▪️ जब जब भी तुम रोते हो मैं तुम हो जाता हूँ रोक नहीं पैसा स्वयं को तरल हो बह जाता हूँ महाकवि की वेदना...!!...
मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा 6 months ago ▪️ आया मकर संक्रांति - अमृता मिश्रा [ छत्तीसगढ़-भिलाई ] उत्तरायण का पुण्य दिन, सूरज करे प्रस्थान। मकर संक्रांति सिखाए, सत् पथ की पहचान।। सूरज...