अब मैं क्या करूँ… क्योंकि वह किसी की – कैलाश जैन बरमेचा 2 weeks ago अब मैं क्या करूँ, अब मैं क्या करूँ, लाडो को तो जाना ही था क्योंकि वह मेरी नहीं थी, वह किसी की अमानत थी। ख़ून...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – प्रकाशचंद्र मण्डल 3 weeks ago ▪️ किस बात का अहंकार - प्रकाशचंद्र मण्डल [ छत्तीसगढ़-भिलाई ] मिट्टी के ढेले में तैयार तुम इंसान के रूप में हो परिचय पर तुम्हें...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – तारकनाथ चौधुरी 3 weeks ago ▪️ • सीढ़ी समी चाहते हैं सीढी़ सभी चाहते हैं ऊपर चढ़ना इसीलिए आदिम युग से अब तक सीढी़ की उपयोगिता पर अनुसंधान जारी है...
स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – सुष्मा बग्गा 3 weeks ago ▪️ • नयन नयन की सुंदरता नयन से नयनों का सुख नयन को , मिलन नयन का हो नयन से बिन शब्दों के करते बातें...
यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता 4 weeks ago ▪️ मेरी पहली यात्रा - विद्या गुप्ता { छत्तीसगढ़-दुर्ग } स्मृतियां वास्तव में एक यात्रा है। जब हम स्मृतियों की लचीली भूमि पर अंकित जीवन...
कविता आसपास : बसंत पंचमी पर महाकवि ‘निराला’ को याद करते हुए… महाकवि की वेदना…!! – विद्या गुप्ता [छत्तीसगढ़-दुर्ग] 1 month ago ▪️ जब जब भी तुम रोते हो मैं तुम हो जाता हूँ रोक नहीं पैसा स्वयं को तरल हो बह जाता हूँ महाकवि की वेदना...!!...
मकर संक्रांति पर विशेष : अमृता मिश्रा 2 months ago ▪️ आया मकर संक्रांति - अमृता मिश्रा [ छत्तीसगढ़-भिलाई ] उत्तरायण का पुण्य दिन, सूरज करे प्रस्थान। मकर संक्रांति सिखाए, सत् पथ की पहचान।। सूरज...
कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी 2 months ago ▪️ कह न सका - तारकनाथ चौधुरी [ छत्तीसगढ़-चरोदा, जिला-दुर्ग ] सागर की लहरों से खेलते-खुश होते शख़्स से कोई यूँ ही पूछ ले अगर...
नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ 2 months ago ❤ • छोड़ आए थे जिन को दिसम्बर में हम, मिल गए उन को हमदम नए साल में... - नूरुस्साबाह खान 'सबा' [ छत्तीसगढ़-दुर्ग ]...
नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : सुशील यादव 2 months ago 💙 • रस्मों को जमाने में निभाने के लिए आ, फिर साल नया साथ मनाने के लिए आ... - सुशील यादव [ छत्तीसगढ़-दुर्ग ] रस्मों...