poetry

■भावांजलि : लता मंगेशकर.

♀ गीता विश्वकर्मा 'नेह' स्वर की देवी सुर साम्राज्ञी लता दीदी तुम थी तो खूब । मेरे अधरों पर थे प्यारे गाए तेरे गीत रसीले,...

■’रोज़ डे’ पर उत्खनन मिली 1997 की सतह पर एक पुरानी कविता- शरद कोकास.

उपहार में दी जाने वाली नाज़ुक वस्तुओं के साथ अपेक्षाएँ जुड़ी होती है जो कभी नहीं टूटती बेरोज़गारी के दिनों में जेबखर्च से पैसे बचाकर...

■स्वरांजलि : सुर की लता-लता मंगेशकर.

■कहीं नहीं गई हो ■पूनम पाठक 'बदायूँ' [ इस्लामनगर,बदायूँ,उत्तरप्रदेश ] कहीं नहीं गई हो = पहाड़ों में नदियों में पेड़ों में लताओं में गूंजेगी सदा...

■स्वरांजलि : सुर की लता-लता मंगेशकर.

■लता मंगेशकर ■डॉ. नीलकंठ देवांगन [ शिवधाम कोडिया,जिला-दुर्ग,छ. ग. ] स्वर साम्राज्ञी कोकिल कंठी स्वर की रानी सुरमल्लिका गायन कला में पारंगता जगतीतल की शीतलता...

■बसंत पंचमी पर विशेष : गीता विश्वकर्मा ‘नेह’

♀ सरस्वती वंदन, हरिगीतिका छंद ♀ गीता विश्वकर्मा 'नेह' [ बालको नगर कोरबा,छत्तीसगढ़ ] वंदन करूँ, अर्चन करूँ,माँ शारदे वरदान दे, स्वर,ताल,अनहद-नाद,लय मृदु-वाक्पटु मधु गान...
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