■कविता आसपास : अमृता मिश्रा ‘निधि’. 5 years ago ♀ जिंदगी ♀ अमृता मिश्रा 'निधि' [ भिलाई, जिला-दुर्ग,छत्तीसगढ़ ] ये सफर के किस मोड़ पर, आ रुकी है जिंदगी.. हर शख्स ने हाथों में,...
■कविता आसपास :तारक नाथ चौधुरी . 5 years ago ♀ सांध्य-पलाश ♀ तारक नाथ चौधुरी [ चरोदा-भिलाई, जिला-दुर्ग,छत्तीसगढ़ ] तुम ऋतुराज बसंत और मैं सांध्य की शुष्क पलाश! दीर्घ बरस इक बीता कैसे, जब...
■’कोशिश’ स्तम्भ : निशांत राज [ अररिया बिहार ] 5 years ago ♀ यूं ही तो नहीं मिलाया होगा ♀ निशांत राज [ कुर्साकांटा,अररिया, बिहार ] तन्हाइयों से तेरी, रब को भी कुछ शिकायतें होंगी मेरे दर्द...
■’कोशिश’ स्तम्भ : श्याम निर्मोही [ बीकानेर राजस्थान ] 5 years ago 1. पिता शब्द की परिभाषा तब समझ नहीं पाया था वो सख़्त स्वभाव वो आपकी बाहरी कठोरता और आपका वो लहज़ा हमेशा कानों को कर्कश...
■राजिम मेला पर विशेष : केवरा यदु ‘मीरा’ [राजिम-छत्तीसगढ़]. 5 years ago ♀ मोर संगी चलना ♀ केवरा यदु 'मीरा' चल संगी चलना राजिम मेला जाबो। राजिम लोचन के दरस करि आबो। मांघी पुन्नी आगे अऊ मेला...
छात्रा दीक्षा समुद्र द्वारा 15 फरवरी 2022 को किये गए सुसाइड समाचार ‘दैनिक भास्कर’ में पढ़कर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीआईडी रायपुर के नरेन्द्र सिक्केवाल के मन के उदगार कविता में पढ़िए 5 years ago ♀ दीक्षा समुद्र ♀ नरेन्द्र सिक्केवाल मेरी बेटी तूने क्यों कर लिया 'डिसाइड' अचानक करने का 'सुसाइड' केवल इतनी सी बात पर कि 'वेलेंटाइन डे'...
■बसंत रितु के गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर. 5 years ago मोर हिरदे के भँवरा ह गुनगुनावत हे मया के दवना ह महमहावत हे बसंती पुरवाही करत हे चारी रंगे के दिन आगे बही तोर पारी...
■वसंत ऋतु पर दो कविताएं : ■देवेश द्विवेदी ‘देवेश’. 5 years ago ♀ वसंत मञ्जरी लगी आमों पर कोयल भी गान करे भंवरा भी गुनगुनाय आला वसन्त है। वसन्ती बयार चले नदिया भी खिलखिलाय धरती के अधरों...
■कविता आसपास : डॉ. कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव. 5 years ago ♀ कोरोना सुन ले मेरी ♀ डॉ. कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव [ जालौन,उत्तरप्रदेश ] दुष्ट कोरोना अब तू सुन तेरी अब तो आफत आई । मास्क...
■छतीसगढ़ी कविता : डॉ. बलदाऊ राम साहू. 5 years ago ♀ बसंत आ गे ♀ डॉ. बलदाऊ राम साहू [ दुर्ग,छत्तीसगढ़ ] देखौ जी, रितु बसंत आ गे, धरती के मन हरसागे। आमा रूख मा...